नौंवे दिन होश में आई दिल्ली एम्स में भर्ती साध्वी पद्मावती, आत्मबोधानंद की हालत में भी सुधार
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गंगा रक्षा के लिए आमरण अनशन कर रही और एम्स दिल्ली में भर्ती मातृ सदन की साध्वी पद्मावती के स्वास्थ्य में सुधार है। मातृ सदन के सूत्रों ने बताया कि वह पूरी तरह से होश में आ गई हैं। ब्रह्मचारी के स्वास्थ्य में भी सुधार है।
मालूम हो कि साध्वी पद्मावती मातृ सदन में गंगा रक्षा के लिए अनशन कर रहीं थी। 17 फरवरी को उनकी हालत बिगड़ने पर एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया था। तब से उनका वहीं उपचार चल रहा है। दूसरी तरफ मातृसदन की सुरक्षा प्रशासन हटाए जाने को लेकर अब स्वामी शिवानंद सरस्वती के शिष्यों ने उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है। बिहार के शोभा छपरा जनपद बलिया के रहने वाले योगेंद्र सिंह ने मंगलवार को मातृसदन पहुंचकर गंगा के प्रति मातृ सदन के समर्पण को समर्थन दिया।
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद के शिष्य रहे योगेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा कि स्वामी शिवानंद सरस्वती संन्यास से पूर्व कोलकात्ता के इंटर कॉलेज में रसायन विज्ञान के अध्यापक रहे हैं। उनके पढ़ाए छात्र देश के विभिन्न प्रांतों के साथ विदेशों में अपनी सेेवाएं दे रहे हैं। ये सभी शिष्य शिवानंद के प्रति समर्पित हैं। यदि जल्दी ही शिवानंद और मातृसदन की सुरक्षा वापस नहीं की गई तो उनके हजारों शिष्य हरिद्वार पहुंचकर इस आंदोलन से जुड़ेंगे और उग्र आंदोलन होगा।
आत्मबोधानंद ने जल भी त्याग दिया था
मातृ सदन की अनुयायी साध्वी पद्मावती ने गंगा रक्षा के लिए 15 दिसंबर को आमरण अनशन शुरू किया था। 30 जनवरी को प्रशासन ने साध्वी पद्मावती को जबरन उठाकर देहरादून के दून अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उसी दिन ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने आमरण अनशन शुरू कर किया।
19 फरवरी को पुलिस प्रशासन ने मातृ सदन से सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मियों को हटा दिया था। इसके विरोध में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने जल भी त्याग दिया था। इसके बाद लगातार उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। एसडीएम कुश्म चौहान, सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह और जिला अस्पताल के डॉक्टरों की टीम मातृ सदन पहुंची।
डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी। प्रशासनिक अधिकारियों ने ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद से आग्रह किया कि वे आमरण अनशन समाप्त कर दें। मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवांनद सरस्वती को भी उन्हें मनाने के लिए आग्रह किया गया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि वे अपने किसी भी ब्रह्मचारी और साध्वी का इलाज उत्तराखंड के किसी भी अस्पताल में नहीं कराएंगे। आखिर चार घंटे बाद दोपहर करीब ढाई बजे आत्मबोधानंद को एम्स दिल्ली ले जाने पर सहमति बनी और प्रशासन की टीम आत्मबोधानंद को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुई।