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खुले रुद्रनाथ के कपाट, शिवमुख की होती है यहां पूजा
अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Sun, 18 May 2014 07:04 PM IST
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पंच केदारों में एक भगवान रुद्रनाथ के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ रविवार को सुबह आठ बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए।
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इस दौरान बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और स्थानीय लोगों ने भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगी। मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट ने बताया कि यहां भोलेनाथ के मुख की पूजा होती है।
शीतकाल में गोपेश्वर में रहते हैं भोलेनाथ
शीतकाल में सात माह भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में और पांच माह तक रुद्रनाथ मंदिर में होती है।
सुरम्य बुग्यालों और हिमखंडों के मध्य से होकर मंडल घाटी से 19 किमी की पैदल दूरी तय कर रुद्रनाथ भगवान की उत्सव डोली शनिवार देर रात रुद्रनाथ पहुंची थी।
केदारबाबा ने नहीं दिए थे पांडवों को दर्शन
रुद्रनाथ मंदिर में भोलेनाथ के मुख की पूजा होती है। किवदंती है कि जब पांडव गौत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए हिमालय के लिए चले तो उन्हें केदार बाबा (भोलेनाथ) ने दर्शन नहीं दिए। वे पांडवों को देख यहां से चले गए।
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केदारनाथ में दलदल होने के कारण बाबा केदार वहां डूबे तो उनका पश्च भाग केदारनाथ, मुख रुद्रनाथ, मध्य भाग मदमहेश्वर, भुजा तुंगनाथ और जटा कल्पेश्वर में निकली। बाद में ये स्थान पंच केदार के नाम से पूजे जाने लगे।
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