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आरटीआई से पता चला एमडीडीए का सच
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 21 Sep 2013 01:02 PM IST
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एमडीडीए ने लगभग एक साल पहले राजधानी में होने वाले निर्माण के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट अनिवार्य किया था। लेकिन आज तक यह आदेश लागू नहीं हो पाया है। ऐसे में नक्शा पास कराने के बाद मानचित्र को दरकिनार करके भी निर्माण किया जाता है।
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सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है। इसको लेकर एमडीडीए अभियंताओं की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजधानी में लगभग सवा सौ से अधिक अपार्टमेंट बन चुके हैं।
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कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना गवारा नहीं समझा
100 से अधिक शापिंग कांप्लेक्स और अन्य बड़े व्यावसायिक निर्माण हो चुके हैं, लेकिन किसी ने भी कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना गवारा नहीं समझा है, जबकि कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के बाद ही किसी निर्माण को वैध माना जाता है।
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इसको लेकर लगातार सुस्ती दिखाई जा रही है। कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद अगर किसी स्तर पर शिकायत होती है तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित अभियंता जिम्मेदार होता है। यह व्यवस्था लागू न होने से सबसे अधिक फायदा बिल्डरों को हो रहा है। वे स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण कराने में कामयाब होते हैं।
क्या है कंप्लीशन सर्टिफिकेट
किसी भी इमारत का निर्माण पूरा होने के बाद उसे चेक किया जाता है। इमारत का निर्माण एमडीडीए की ओर से स्वीकृत मानचित्र के अनुसार हुआ या नहीं। अगर स्वीकृत मानचित्र के अनुसार निर्माण किया गया तो कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। न होने की स्थिति में आपत्ति लगाई जाती है। इसके जारी होने के बाद ही बिल्डर अपने फ्लैट या दुकानों को बेच सकता है।