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पचास सालों में नदियां विलुप्ति के कगार पर, पुनर्जनन जरूरी
दीप जोशी/अमर उजाला,अल्मोड़ा
Updated Wed, 26 Apr 2017 02:57 PM IST
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पहाड़ में नदियां लगातार सूख रही हैं और पिछले 50 सालों में मुख्य नदियों का जल स्तर कम हो जाने के साथ ही उनकी सैकड़ों सहायक नदियां और गाड़-गधेरे विलुप्त हो गए हैं, लेकिन सरकारी व्यवस्था में कोई ऐसा विभाग अथवा एजेंसी नहीं बनाई गई है जिस पर नदियों के सूखने पर कोई जवाबदेही तय हो।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नदियों को बचाने और उनके पुनर्जनन के लिए नदी पुनर्जनन प्राधिकरण जैसी एजेंसी का गठन होना चाहिए जो नदियों के रखरखाव के लिए जवाबदेह हो।
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कुमाऊं में स्थित कोसी, गगास, पनार, सरयू , पश्चिमी रामगंगा सहित अधिकांश नदियां गैर हिमानी हैं। इनका उद्गम हिमालय से नहीं होता और यह नदियां मुख्य तौर पर बारिश के जल पर निर्भर रहती हैं। बारिश का पानी पर्याप्त मात्रा में धरती के भीतर जाने की स्थिति में ही नदियां लबालब रह सकती हैं, लेकिन बीते चार-पांच दशकों के बाद से जंगलों के अनियंत्रित दोहन, जनसंख्या विस्तार के साथ भवनों, सड़कों और तमाम तरह के अन्य निर्माण कार्यों का सर्वाधिक असर नदियों पर पड़ा है। चौड़ी पत्ती के वनों के घटने और हाल के वर्षों में बारिश का आचरण बदलने आदि कारणों से वर्षा जल धरती के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं जा पा रहा है। धरती के भीतर जल भंडार समाप्त हो रहे हैं और नदियां सूख रही हैं।
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सरकारी व्यवस्था में इसके लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं है। अगर जल स्रोत सूखने से पानी की योजना बंद हो जाए तो जल संस्थान के अधिकारी यह जवाब देते हैं कि उनकी जिम्मेदारी पेयजल वितरण की है जल स्रोत सूखने से उनका कोई मतलब नहीं है। इसी तरह अगर नदी के सूखने से कोई सिंचाई नहर बंद होती है तो सिंचाई विभाग भी यही जवाब देता है कि उनकी जिम्मेदारी नहर से पानी वितरण तक सीमित है। नदी सूखने के लिए उनका कोई दोष नहीं है। वर्तमान व्यवस्था में नदी अथवा जल स्रोत के सूखने की जवाबदेही के लिए किसी विभाग को कोर्ट में खड़ानहीं किया जा सकता।
अल्मोड़ा स्थित एनआरडीएमएस कुमाऊं विवि परिसर के भूगोलविद और निदेशक प्रो.जेएस रावत ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में नदियों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसी विभाग पर नहीं है। अगर कोई नदी अथवा सहायक नदी सूख जाती है तो किसी भी विभाग की जवाबदेही नहीं है और इसके लिए किसी विभाग को कोर्ट में खड़ा नहीं किया जा सकता। नदियों के रखरखाव के लिए नदी पुनर्जनन प्राधिकरण का गठन होना जरूरी है। तभी नदियों का सही मायने में संरक्षण हो सकेगा।