गंगा नदी में राफ्टिंग करना अब नहीं होगा आसान
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गंगा नदी में राफ्टिंग कराने की इच्छुक कंपनियों को लाइसेंस फिलहाल नहीं मिलेगा। इसके लिए पहले गंगा नदी की धारण क्षमता का निर्धारण किया जाएगा।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की राफ्टिंग क्याकिंग नियमावली-2014 के तहत यह कवायद की जा रही है। तीर्थनगरी ऋषिकेश के नजदीक शिवपुरी, कौड़ियाला में राफ्टिंग बड़े रोजगार का रूप धारण कर चुकी है।
गंगा नदी में ही सर्वाधिक राफ्ट संचालित होती रही हैं। इसी वजह से अबकी नदी की धारण क्षमता को जांचने की कवायद की जा रही है।
अलग-अलग नदियों के लिए अलग से लेनी अनुमति
इसके बाद ही इस नदी में राफ्टिंग संचालन की इच्छुक कंपनियों से लाइसेंस के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
अलबत्ता उत्तराखंड में अन्य नदियों मसलन अलकनंदा, भागीरथी, कालीनदी, शारदा, यमुना टोंस, गोरी, सरयू, कोसी रामगंगा में राफ्टिंग संचालन केइच्छुक आने वाली 31 जुलाई तक राफ्टिंग के लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बता दें कि नियमावली के अनुसार हर कंपनी को अलग-अलग नदियों के लिए रिवर राफ्टिंग की अनुमति अलग-अलग लेनी होगी। फिलहाल, आवेदन के लिए कुल एक हजार रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है।
35 सौ करोड़ का है कारोबार
प्रदेश में राफ्टिंग का कारोबार तकरीबन 35 सौ
करोड़ रुपए का है। सैलानियों का सर्वाधिक पसंदीदा ट्रैक शिवपुरी से ऋषिकेश
का है। यहां लोग राफ्टिंग के साथ ही कैंपिंग भी करना पसंद करते हैं। इसके
लिए दिनों के हिसाब से पैकेज बनते हैं।
गंगा की धारण क्षमता का निर्धारण होने में अभी वक्त लगेगा। इसके लिए सिस्टम बनाया जा रहा है। सभी कुछ नियमावली के अनुसार होगा। फिलहाल अन्य नदियों में राफ्टिंग को संचालकों से आवेदन मांगे गए हैं।
- एके द्विवेदी, संयुक्त निदेशक, पर्यटन
यह हैं राफ्टिंग ट्रैक
शिवपुरी से ऋषिकेश
कौड़ियाला से ऋषिकेश
मरीन ड्राइव ऋषिकेश
रुद्रप्रयाग से ऋषिकेश
(रुद्रप्रयाग से ऋषिकेश का एक्पीडिशन 4-5 दिन का है)
कंपनियों के हिसाब से पैकेज
राफ्टिंग के लिए पैकेज कंपनियों के हिसाब से तय होते हैं। अभी तक जो औसत चल रहा था वह शिवपुरी से ऋषिकेश ट्रैक के लिए 750 रुपए, मरीन ड्राइव के लिए 950 रुपए, जबकि कौड़ियाला से ऋषिकेश का 1200 रुपए चल रहा था।
गंगा नदी राफ्टिंग के लिए सबसे सुरक्षित नदियों में है। हर रैपिड के बाद इसकी धारा की तीव्रता कम हो जाती है। दिक्कत तो राफ्टिंग के लिए पुट इन (जहां राफ्ट नदी में डाली जाती है), पुल आउट (जहां से राफ्ट नदी से बाहर निकाली जाती है) प्वाइंट्स पर है। यहां दूसरे वाहनों का अतिक्रमण रहता है। यह समस्या दूर होनी चाहिए।
- किरन भट्ट टोडरिया, राफ्टिंग ऑपरेटर