रिक्शाचालक व ड्राइवर के बेटों ने किया IMA टॉप
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केरल में रिक्शा चलाने वाले मनिक्कन के बेटे मनोज ने कड़ी मेहनत के बूते एक लंबा सफर तय कर परिवार का पहला सैन्य अफसर बनने का सपना साकार कर दिया है। आईएमए के कैडेट कॉलेज में कला स्नातक के टापर मनोज कुशाग्र बुद्धि के थे, लेकिन परिवार आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर था। जवाहर नवोदय विद्यालय में निशुल्क शिक्षा हासिल कर उन्होंने इंटर पास किया।
परिवार पर कॉलेज के खर्च का भार डालने के बजाय मनोज दस वर्ष पहले बतौर सैनिक वायुसेना में शामिल हो गए। सख्त ड्यूटी के बीच समय निकालकर उन्होंने मेहनत जारी रखी, जिसके बूते उन्होंने आईएमए में प्रवेश मिला।
आर्मी कैडेट कॉलेज में चयनित होने वाले कई सैनिक छोटे कस्बों और गांवों के निम्न मध्यम वर्ग परिवार से आते हैं। उन्होंने सैनिक से अफसर बनने के इस सफर में परिवार के आर्थिक हालात को कभी आड़े नहीं आने दिया।
आर्मी कैडेट में पहुंचने वाले सैनिक मानते हैं कि सेना में अब पहले के मुकाबले बेहतर अवसर हैं। सही मार्गदर्शन मिले तो सैनिक से अफसर बनने की राह मुश्किल नहीं है।
ड्राइवर के बेटा पहले सैनिक बना फिर अफसर
मनोज की तरह ही उनके बैच में एम. जॉनसन भी सर्विस विषय के टापर हैं। जॉनसन ने बताया कि उनके पिता एम. इनोचा प्राइवेट ड्राइवर हैं। इंटर करने के बाद कॉलेज जाने की जगह रोजगार उनकी प्राथमिकता थी। सेना की इंजीनियरिंग कोर में मौका मिला तो सैनिक बनने में हिचक नहीं की।
मणिपुर के रहने वाले जॉनसन ने बताया कि परिवार के लिए उनका सैनिक बनना भी बड़ी खुशी थी। पिता एम. इनोचा उनके लिए प्रेरणा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सैनिक बनने के बाद उन्होंने अफसर बनने की ठानी। कड़ी मेहनत के बल पर वह अंतर सर्विस चयन और स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड में चयनित हुए।
जम्मू कठुआ के कमल शर्मा के पिता अध्यापक है। कमल बीएससी के टापर हैं। वर्ष 2005 में कमल शर्मा ने एयरफोर्स में बतौर एयरमैन ज्वाइन किया। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा कड़ी थी, लेकिन उन्होंने सैन्य अफसर बनने की ठान रखी थी। परिवार की मदद मिला और सीनियरों के सहयोग से वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं।