उत्तराखंड: अवसाद और निद्रा विकार की चपेट में सेवानिवृत्त बुजुर्ग, एकाएक हुए जीवन में खालीपन से पनप रहा मनोरोग
सेवानिवृत्त बुजुर्ग अवसाद और निद्रा विकार की चपेट में हैं। जिला अस्पताल और दून मेडिकल कॉलेज में हर महीने 20 से अधिक सेवानिवृत्त बुजुर्ग पहुंच रहे हैं।
विस्तार
नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद जीवन में अचानक आया खालीपन बुजुर्गों को मानसिक रोगी बना रहा है। इसकी वजह से वे अवसाद, चिंता और निद्रा विकार की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल और दून मेडिकल कॉलेज में इस तरह के हर महीने 20 से भी अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार जिंदगी भर नौकरी करने के बाद जब कोई भी व्यक्ति सेवानिवृत्त होकर अचानक घर बैठ जाता है तो उसके मस्तिष्क में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इसकी वजह से मस्तिष्क में के सेरोटोनिन और नॉरेपिनेफ्रिन नाम के न्यूरो केमिकल की मात्रा घट जाती है। साथ ही निर्णय लेने, योजना बनाने और भावनाओं को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के फ्रंटल लोब और नई यादें बनाने में सहायता करने वाले हिप्पोकैम्पस का आकार भी कम होने लगता है।
जिला अस्पताल की वरिष्ठ मनो चिकित्सक डॉ. निशा सिंगला और दून मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की एचओडी डॉ. जया नवानी ने विस्तार से जानकारी दी। उनके अनुसार सेवानिवृत्त होने के बाद जब लोग घर पर पूरा समय व्यतीत करते हैं तो उन्हें काम से मिलने वाली पहचान और बंद हुए सामाजिक संवाद की चिंता सताती है।
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इतना ही नहीं वे घर में रहकर बार-बार बच्चों को समय से घर आने के लिए पूछते हैं। जब उनकी मर्जी के मुताबिक परिवार के लोग निर्णय नहीं ले पाते तो उन्हें अपनी अहमियत कम होने का एहसास होने लगता है। यही कारण है कि वे चिड़चिड़े होने लगे हैं। इसका सीधा असर उनके मस्तिष्क पर पड़ता और कई मानसिक असंतुलन जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं।
मानसिक विकार को शारीरिक बीमारी के रूप में बताते हैं
डॉ. निशा के मुताबिक इस तरह के बड़ी संख्या में बुजुर्ग अपनी मानसिक परेशानी को शारीरिक बीमारी के रूप में बताते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें पेट, सिर और कमर में दर्द है। जब उनकी काउंसलिंग की जाती है तो पता चलता है कि उनमें मानसिक विकार होने की बात सामने आती है। इस तरह की परिस्थिति को वैज्ञानिक भाषा में सोमैटिक डिसॉर्डर कहते हैं।
यह करें सेवानिवृत्त बुजुर्ग
-सेवानिवृत्त होने से पहले जीवन में व्यस्त रहने की योजना बना लें
-बच्चों को अपने हिसाब से जिंदगी जीने दें
-पुराने दोस्तों के समूह के साथ समय व्यतीत करें