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Uttarakhand: पहाड़ से बाजार पहुंचा काफल का स्वाद, बढ़ी आमदानी, चारधाम यात्री भी उठा रहे लुत्फ

Sun, 10 May 2026 05:08 PM IST
Alka Tyagi सत्य प्रसाद मैठाणी, संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर गढ़वाल
सत्य प्रसाद मैठाणी, संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर गढ़वाल Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 10 May 2026 05:08 PM IST
सार

खिर्सू, जोगड़ी, ग्वाड़ और खेड़ाखाल जैसे गांवों से ग्रामीण शाम के समय जंगलों से काफल तोड़ते हैं और अगले दिन तड़के श्रीनगर बाजार में काफल की छोटी-छोटी टोकरी सज जाती हैं।

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काफल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पहाड़ों की पहचान माने जाने वाले काफल की मिठास इन दिनों शहर के बाजारों में घुलने लगी है। खिर्सू व उससे लगे ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग काफल लेकर आजकल श्रीनगर पहुंच रहे हैं। सुबह होते ही बस अड्डे और मुख्य बाजारों के आसपास ग्रामीण काफल बेचते नजर आ रहे हैं। चारधाम यात्रा के चलते यात्री भी इस पहाड़ी क फल का जमकर स्वाद ले रहे हैं।

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खिर्सू, जोगड़ी, ग्वाड़ और खेड़ाखाल जैसे गांवों से ग्रामीण शाम के समय जंगलों से काफल तोड़ते हैं और अगले दिन तड़के श्रीनगर बाजार में काफल की छोटी-छोटी टोकरी सज जाती हैं। खास बात यह है कि दोपहर होने से पहले अधिकांश काफल हाथों-हाथ बिक भी जाते हैं। ग्रामीणों के लिए काफल का सीजन अच्छी आमदनी का जरिया बन गया है। ग्वाड़ गांव से काफल बेचने आए हर्षलाल ने बताया कि इस बार काफल करीब 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। एक टोकरी में सात से आठ किलो तक काफल आ जाता है।
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वहीं जोगड़ी के राहुल, रंजन और सौरभ ने बताया कि वे कांच के गिलास के हिसाब से 30 रुपये में काफल बेच रहे हैं। एक टोकरी से करीब दो हजार से 2200 रुपये तक की बिक्री हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि काफल बेचने के बाद वे श्रीनगर से घर का राशन और जरूरी सामान खरीदकर वापस गांव लौट जाते हैं।
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इससे एक ओर उनकी आमदनी हो रही है तो दूसरी ओर घरेलू जरूरतें भी पूरी हो रही हैं। कई छात्र भी खाली समय में काफल बेचकर परिवार की मदद कर रहे हैं। काफल को स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। पहाड़ का यह पारंपरिक फल स्वाद के साथ-साथ लोगों को गर्मी के मौसम में ताजगी भी देता है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्री भी काफल का स्वाद लेने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं।

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