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Dehradun News: नामी वकील की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज हुई तो शुरू की आत्मसमर्पण की दौड़
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रजिस्ट्रार ऑफिस की गड़बड़ी के मामले में तलवार लटकने पर अब शहर के नामी वकील की रातों की नींद उड़ गई है। कहीं कुछ और रास्ता नहीं सूझा तो यह नामी वकील कोर्ट की शरण में जा पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई। लेकिन, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इस पर वकील ने अब आत्मसमर्पण का रास्ता चुना है।
मंगलवार शाम उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण के लिए प्रार्थनापत्र लगा दिया। हालांकि, अभी इस पर कोई फैसला अभी नहीं आया है। बताया जा रहा है कि पुलिस वकील को इससे पहले गिरफ्तार भी कर सकती है। इस वकील का नाम राजस्व मामलों के बड़े अधिवक्ताओं में गिना जाता है।
बता दें कि रजिस्ट्रार ऑफिस की गड़बड़ी का मामला खुलने के बाद बीते एक माह से कचहरी का माहौल बेहद गर्माया हुआ है। एसआईटी ने जब कार्रवाई शुरू की तो इमरान वकील का नाम सामने आया। इमरान के चैंबर में पुलिस जांच के लिए पहुंची तो वहां तमाम तरह की चर्चाएं होने लगीं। पता चला कि इमरान के साथ एक अन्य वकील अर्पित चावला का नाम भी जुड़ा है। इसके बाद एसआईटी ने इमरान को गिरफ्तार कर लिया। इमरान से पूछताछ में जांच एक बार फिर कचहरी की तरफ मुड़ गई। इस जांच में पिछले दिनाें शहर के एक नामी वकील का नाम सामने आ गया। इस बीच सोमवार को जब वकील का मुंशी एसटीएफ की पकड़ में आया तो उनके नाम पर जैसे मुहर ही लग गई।
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देर शाम लगाई आत्मसमर्पण की अर्जी
इस बीच यह बात साफ हो गई कि वकील के कहने पर ही सब कुछ हुआ है। ऐसे मे अधिवक्ता ने अपने बचाव के लिए कोर्ट का रास्ता चुन लिया। लेकिन, यहां इस नामी वकील के दांवपेंच नहीं चले और कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। सूत्रों के मुताबिक यहां एक बार फिर इस नामी वकील ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए आत्मसमर्पण का रास्ता अपनाना चाहा। लिहाजा, शाम के वक्त वह सरेंडर की अर्जी लेकर कोर्ट पहुंच गए। बताया जा रहा है कि नियमानुसार इस पर अब पुलिस से रिपोर्ट मांगी जानी है। लेकिन, पुलिस ने भी वकील की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।
100 करोड़ से ज्यादा का हो सकता है फर्जीवाड़ा
अभी तक इस मामले में 20 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। लेकिन, अब जैसे इस वकील का नाम सामने आ रहा है तो इसे और भी बड़ा माना जा रहा है। वकील का मुंशी ही एक दो नहीं बल्कि दस से ज्यादा जमीनों के दस्तावेज तैयार करा चुका है। इसके लिए उसे भी अच्छी खासी रकम दी गई है। पुलिस के अनुसार वकील के मुंशी और पीआरडी जवान को प्रति मामला पांच-पांच लाख रुपये दिए जाते थे। जबकि, इस पूरे मामले में 18 करोड़ रुपये तो अकेले इमरान ही हड़प कर चुका है। इस तरह यदि इस नामी वकील के खातों आदि की जांच हो तो यह मामला 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है।
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मंगलवार शाम उन्होंने कोर्ट में आत्मसमर्पण के लिए प्रार्थनापत्र लगा दिया। हालांकि, अभी इस पर कोई फैसला अभी नहीं आया है। बताया जा रहा है कि पुलिस वकील को इससे पहले गिरफ्तार भी कर सकती है। इस वकील का नाम राजस्व मामलों के बड़े अधिवक्ताओं में गिना जाता है।
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बता दें कि रजिस्ट्रार ऑफिस की गड़बड़ी का मामला खुलने के बाद बीते एक माह से कचहरी का माहौल बेहद गर्माया हुआ है। एसआईटी ने जब कार्रवाई शुरू की तो इमरान वकील का नाम सामने आया। इमरान के चैंबर में पुलिस जांच के लिए पहुंची तो वहां तमाम तरह की चर्चाएं होने लगीं। पता चला कि इमरान के साथ एक अन्य वकील अर्पित चावला का नाम भी जुड़ा है। इसके बाद एसआईटी ने इमरान को गिरफ्तार कर लिया। इमरान से पूछताछ में जांच एक बार फिर कचहरी की तरफ मुड़ गई। इस जांच में पिछले दिनाें शहर के एक नामी वकील का नाम सामने आ गया। इस बीच सोमवार को जब वकील का मुंशी एसटीएफ की पकड़ में आया तो उनके नाम पर जैसे मुहर ही लग गई।
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देर शाम लगाई आत्मसमर्पण की अर्जी
इस बीच यह बात साफ हो गई कि वकील के कहने पर ही सब कुछ हुआ है। ऐसे मे अधिवक्ता ने अपने बचाव के लिए कोर्ट का रास्ता चुन लिया। लेकिन, यहां इस नामी वकील के दांवपेंच नहीं चले और कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी। सूत्रों के मुताबिक यहां एक बार फिर इस नामी वकील ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए आत्मसमर्पण का रास्ता अपनाना चाहा। लिहाजा, शाम के वक्त वह सरेंडर की अर्जी लेकर कोर्ट पहुंच गए। बताया जा रहा है कि नियमानुसार इस पर अब पुलिस से रिपोर्ट मांगी जानी है। लेकिन, पुलिस ने भी वकील की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं।
100 करोड़ से ज्यादा का हो सकता है फर्जीवाड़ा
अभी तक इस मामले में 20 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। लेकिन, अब जैसे इस वकील का नाम सामने आ रहा है तो इसे और भी बड़ा माना जा रहा है। वकील का मुंशी ही एक दो नहीं बल्कि दस से ज्यादा जमीनों के दस्तावेज तैयार करा चुका है। इसके लिए उसे भी अच्छी खासी रकम दी गई है। पुलिस के अनुसार वकील के मुंशी और पीआरडी जवान को प्रति मामला पांच-पांच लाख रुपये दिए जाते थे। जबकि, इस पूरे मामले में 18 करोड़ रुपये तो अकेले इमरान ही हड़प कर चुका है। इस तरह यदि इस नामी वकील के खातों आदि की जांच हो तो यह मामला 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है।