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अब नहीं दिखेंगे केदारनाथ आपदा में हुई तबाही के निशान
विनय बहुगुणा/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Fri, 21 Apr 2017 05:30 PM IST
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kedarnath
- फोटो : amar ujala
केदारनाथ धाम को संवारने के लिए नए नए प्रयोग किए जा रहे हैं।
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पहले आरसीसी दीवार पर थ्रीडी पेंटिंग के जरिए केदारनाथ के इतिहास को अंकित करने की योजना बनाई गई और अब मंदिर के पीछे आपदा से भरे मलबे और बोल्डरों का समतलीकरण कर पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। पार्क निर्माण की योजना का खाका भी तैयार किया जा चुका है।
मेरू-सुमेरू पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी पर विराजमान केदारनाथ धाम की सुरक्षा के लिए बीते तीन वर्ष से पुनर्निर्माण कार्य हो रहे हैं। यहां चोराबाड़ी ताल के ठीक नीचे से लेकर मंदिर के दो सौ मीटर पीछे तक त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवार बनाई गई है, लेकिन अब भी एमआई-17 हेलीपैड के किनारे से लेकर मंदाकिनी नदी के छोर तक बड़े क्षेत्र में बोल्डर व मलबा है।
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अर्द्धचंद्राकार में फैले इस क्षेत्र को पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां बोल्डरों और मलबे को एक साथ समतल किया जाएगा। इसके बाद वातानुकूलित छोटे-छोटे पौध उगाने के साथ प्रकृति पार्क बनाया जाएगा। बता दें कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान पहले ही आरसीसी दीवार पर थ्रीडी पेंटिंग के जरिए केदारनाथ के इतिहास को अंकित करने की योजना बना चुका है।
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मंदिर के पीछे वीरान पड़े क्षेत्र को पार्क के रूप में विकसित कर केदारनाथ को और सुंदर बनाने की योजना है। पार्क निर्माण की कार्ययोजना शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों व उच्चाधिकारियों की राय के बाद इसे मूल रूप दिया जाएगा।
- रंजना, जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग