'जैसे सोमनाथ मंदिर बना, उसी तर्ज पर राम मंदिर बनवाए केंद्र'
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विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में दूसरे दिन राम मंदिर निर्माण का एक मात्र प्रस्ताव पारित किया गया। संतों ने जोर देकर कहा कि अब न्यायालय की लंबी लड़ाई में उलझने का कोई औचित्य नहीं है।
भारत सरकार को सोमनाथ की तर्ज पर संतों को साथ लेकर राम मंदिर का निर्माण शुरू कराना चाहिए। वहीं संतों ने काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि के लिए भी हुंकार भरी।
प्राचीन राम मंदिर में श्रीराम के नए मंदिर का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी कृष्णाचार्य महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संत वक्ताओं ने कहा कि स्वाधीनता के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए भारत सरकार से सोमनाथ के मंदिर का निर्माण कराया था।
इसके प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में स्वयं राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित रहे थे। ऐसे में अब भारत सरकार को खुद पहल कर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराना चाहिए।
‘न्यायालय की लड़ाई में तो लग जाएंगे सौ साल’
विहिप मार्गदर्शक मंडल बैठक ने निर्णय लिया है कि रामलला की लड़ाई न्यायालय में ले जाने का कोई लाभ नहीं है। 1947 से आज तक इतने साल बीत गए, मामला अब भी अदालत में है। ये लड़ाई चलती रही तो सौ साल और बीत जाएंगे।
अनेक विहिप नेताओं और संतों ने कहा कि जो लोग वादी हामिद अंसारी को साथ लेकर सुलह करना चाह रहे हैं, वे अंधेरे में न रहें। वृद्ध हामिद ने अपना नाम हटाकर अपने बेटे का नाम वादी की सूची में जुड़वा दिया है। उनके अलावा नौ और वादी मौजूद हैं। यही नहीं मुस्लिम वक्फ बोर्ड भी वादी बना हुआ है।
जो मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, वह भी बहुत लंबा खिंचेगा। अपील में करीब 24 हजार पृष्ठों के दस्तावेज दाखिल किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इन सभी का अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध कराया जाए। विहिप महामंत्री चंपतराय ने कहा कि अखाड़ा परिषद के श्रीमहंत ज्ञानदास सुलह के जो प्रयास कर रहे हैं, उनसे हल निकलने का कोई आसार नहीं। समय की मांग है कि मंदिर निर्माण के लिए अब भारत सरकार ही रास्ता साफ करे।
‘बाबर के नाम से देश में नहीं बनने देंगे कोई मस्जिद’
संतों ने घोषणा की है कि बाबर के नाम से देश के किसी भी भाग में कोई मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी। अयोध्या की तमाम भूमि श्रीरघुनाथ सरकार की है। रामलला की धरती पर न तो कोई इस्लामिक पूजा स्थल बनाया जा सकता है और न ही कोई इस्लामिक सांस्कृतिक केंद्र। किसी भी सरकार अथवा संगठन को ऐसा प्रयास नहीं करना चाहिए।
बैठक को संबोधित करते हुए विहिप के महामंत्री चंपतराय ने कहा कि उच्च न्यायालय निर्णय दे चुका है कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहां सन-1528 से पहले विशाल राम मंदिर था, जिसे बाबर ने तोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि संत समाज प्रधानमंत्री से मिलकर मांग करेगा कि राम मंदिर का निर्माण सरकार स्वयं पहल कर कराए।
गुलामी के दौर के प्रतीकों को बदलने की मांग
संतों ने हवाला दिया कि दिल्ली से जार्ज पंचम और विक्टोरिया की प्रतिमाएं हटाई गई थी। मिंटो ब्रिज का नाम बदलकर शिवाजी ब्रिज रखा गया। इसी प्रकार अनेक शहरों के नाम बदले गए।
अब यह मार्गदर्शक मंडल मांग करता है कि गुलामी के प्रतीक सभी अवशेषों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने राम जन्मभूमि को हिंदुओं की आस्था की भूमि बताया। प्रस्ताव का समर्थन अयोध्या के श्रीमहंत धर्मदास ने किया तथा अनुमोदन श्रीमहंत कन्हैयादास ने किया।