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Dehradun News: प्रदूषण जांच में निजी वाहन स्वामियों की दिलचस्पी कम
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वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच कराने के मामले में निजी चौपहिया और दोपहिया वाहन रखने वाले लोग गंभीर नहीं हैं। नगर व आसपास के प्रदूषण जांच केंद्रों की स्थिति देखकर यह स्पष्ट होता है कि प्रदूषण जांच पर सिर्फ और सिर्फ व्यावसायिक वाहन स्वामी या चालकों का ही अधिक ध्यान रहता है।
विकासनगर और हरबर्टपुर में संचालित हो रहे चार प्रदूषण जांच केंद्रों पर एक दिन में 10 से 12 वाहन प्रदूषण जांच के लिए आते हैं। किसी दिन यह संख्या घटकर चार-पांच तक भी रह जाती है। प्रदूषण जांच करने वाले परीक्षित सैनी बताते हैं कि जांच के लिए आने वाले वाहनों में अधिकतर वाहन ट्रक, डंपर, बस, विक्रम, ई-रिक्शा या टैक्सी परमिट चौपहिया वाहन होते हैं। निजी चौपहिया वाहन और बाइक, स्कूटर इक्का दुक्का ही आते हैं
केंद्र संचालक मोहित अग्रवाल ने बताया कि निजी वाहन रखने वाले अधिकतर लोगों को आज भी प्रदूषण जांच से संबंधित जानकारी नहीं रहती है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी प्रदूषण जांच को लेकर गंभीर नहीं होते हैं। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग की जांच या चालान आदि के बाद जरूर ऐसे वाहन चालक प्रदूषण जांच कराते हैं।
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प्रदूषण जांच के अलग-अलग निर्धारित हैं मानक
वाहनों की जांच के मानक अलग-अलग निर्धारित हैं। इनमें यूरो-2, यूरो-4, यूरो-6 आदि के आधार पर कार्बन मोनोऑक्साइड व पीपीएम उत्सर्जन के मानक तय हैं। उप संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन रावत सिंह कटारिया ने बताया कि प्रदूषण जांच केंद्रों पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन अर्थात पीपीएम की मात्रा की जांच करके पोर्टल से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी होता है। कार्बन मोनोआक्साइड और हाइड्रोकार्बन की मात्रा अधिक होने पर प्रमाणपत्र जारी नहीं होता है। प्रदूषण जांच नहीं कराने वालों पर विभाग के माध्यम से नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
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विकासनगर और हरबर्टपुर में संचालित हो रहे चार प्रदूषण जांच केंद्रों पर एक दिन में 10 से 12 वाहन प्रदूषण जांच के लिए आते हैं। किसी दिन यह संख्या घटकर चार-पांच तक भी रह जाती है। प्रदूषण जांच करने वाले परीक्षित सैनी बताते हैं कि जांच के लिए आने वाले वाहनों में अधिकतर वाहन ट्रक, डंपर, बस, विक्रम, ई-रिक्शा या टैक्सी परमिट चौपहिया वाहन होते हैं। निजी चौपहिया वाहन और बाइक, स्कूटर इक्का दुक्का ही आते हैं
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केंद्र संचालक मोहित अग्रवाल ने बताया कि निजी वाहन रखने वाले अधिकतर लोगों को आज भी प्रदूषण जांच से संबंधित जानकारी नहीं रहती है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी प्रदूषण जांच को लेकर गंभीर नहीं होते हैं। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग की जांच या चालान आदि के बाद जरूर ऐसे वाहन चालक प्रदूषण जांच कराते हैं।
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प्रदूषण जांच के अलग-अलग निर्धारित हैं मानक
वाहनों की जांच के मानक अलग-अलग निर्धारित हैं। इनमें यूरो-2, यूरो-4, यूरो-6 आदि के आधार पर कार्बन मोनोऑक्साइड व पीपीएम उत्सर्जन के मानक तय हैं। उप संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन रावत सिंह कटारिया ने बताया कि प्रदूषण जांच केंद्रों पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन अर्थात पीपीएम की मात्रा की जांच करके पोर्टल से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी होता है। कार्बन मोनोआक्साइड और हाइड्रोकार्बन की मात्रा अधिक होने पर प्रमाणपत्र जारी नहीं होता है। प्रदूषण जांच नहीं कराने वालों पर विभाग के माध्यम से नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।