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आदि कैलाश को विश्व धरोहर घोषित करने की तैयारी, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया सर्वे

Wed, 18 Nov 2020 02:14 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 18 Nov 2020 02:14 PM IST
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Preparation to declare Adi Kailash as world heritage
आदी कैलाश पर्वत - फोटो : अमर उजाला

पिथौरागढ़ में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश को विश्व धरोहर घोषित करने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम ने आदि कैलाश का विस्तृत सर्वे किया है। संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से सर्वे रिपोर्ट तैयार करके केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से इसे यूनेस्को को भेजा जाएगा।

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भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन ने बताया कि पिथौरागढ़ में स्थित आदि कैलाश का धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व भी है। केंद्र सरकार की ओर से आदि कैलाश को विश्व धरोहर घोषित कराने की पहल की गई है। संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम आदि कैलाश का विस्तृत सर्वे करने के बाद रिपोर्ट तैयार करने में जुट गए हैं।
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कई नामों से जाना जाता है आदि कैलाश

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदि कैलाश को शिव कैलाश, छोटा कैलाश, बाबा कैलाश के साथ ही जोंगलिंगकोंग के नाम से भी जाना जाता है। जो हिंदू धर्मावलंबी कैलाश मानसरोवर की यात्रा नहीं कर पाते हैं वे आदि कैलाश का दर्शन कर पुण्य लाभ कमाते हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से हर साल आदि कैलाश यात्रा का आयोजन किया जाता है। आदि कैलाश में मानसरोवर झील की तर्ज पर पार्वती सरोवर झील है, जिसमें श्रद्धालु स्नान करते हैं। 
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धारचूला से 157 किमी दूर है पर्वत

आदि कैलाश पर्वत पिथौरागढ़ के धारचूला से 157 किलोमीटर की दूरी पर है। गाड़ियों से 52 किलोमीटर तक जाने के बाद श्रद्धालुओं को 105 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो बेहद दुर्गम है।

देश में हैं 38 विश्व धरोहर

यूनेस्को की ओर से जारी की गई विश्व धरोहरों की सूची में देश में 38 प्राकृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल शामिल हैं। इनमें उत्तराखंड के नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान व वैली ऑफ फ्लॉवर्स शामिल हैं।


इसके अलावा आगरा का ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, ओडिशा का सूर्य मंदिर, महाराष्ट्र में अजंता, एलोरा की गुफाएं, तमिलनाडु में ग्रेट लिविंग चोल मंदिर, कर्नाटक का पट्टकल स्मारक, राजस्थान स्थित केवलादेव पक्षी विहार, असम टाइगर रिजर्व, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क हिमाचल प्रदेश, कंचनजंगा नेशनल पार्क असम, महाबोधि मंदिर और एलीफेंटा की गुफाएं भी इसमें शामिल हैं।

आदि कैलाश को विश्व धरोहर में शामिल कराने के उद्देश्य से सर्वे किया गया है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। 
- डॉ. धनंजय मोहन, निदेशक भारतीय वन्यजीव संस्थान

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