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Dehradun News: अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मिल रही तारीख, गर्भवतियां परेशान
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I- उप जिला अस्पताल में रोस्टर सिस्टम से प्रतिदिन हो रहे महज 20 अल्ट्रासाउंड
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I- 60 गर्भवती महिलाएं और मरीज पहुंचते हैं प्रतिदिन, सात से आठ दिन बाद की दी जा रही तारीखI
उप जिला अस्पताल विकासनगर में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए गर्भवती महिलाओं और मरीजों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मरीजों को सात से आठ दिन बाद की तारीख दी जा रही है। इसका मुख्य कारण मरीजों की अधिकता और सीमित संख्या में जांच होना है।
पछवादून और जौनसार बावर क्षेत्र में एक उप जिला अस्पताल और तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से केवल उप जिला अस्पताल विकासनगर में ही अल्ट्रासाउंड जांच होती है। रोस्टर सिस्टम से सप्ताह में तीन दिन गर्भवती और तीन दिन पेट संबंधी रोगों के मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच होती है। अस्पताल में जांच के लिए रोजाना 60 गर्भवती महिलाएं और मरीज पहुंचते हैं। त्यूणी, चकराता, साहिया, कालसी, विकासनगर, सहसपुर के साथ सीमांत हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल से मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए उप जिला अस्पताल ही आते हैं। कभी-कभी मरीजों की संख्या 100 तक भी पहुंच जाती है।
वहीं, अस्पताल में प्रतिदिन महज 20 अल्ट्रासाउंड जांच ही की जाती हैं। बाकी मरीजों को जांच की तिथि देकर वापस भेज दिया जाता है। ऐसे में दूर दराज के क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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Iत्यूणी में मशीन है पर नहीं होते अल्ट्रासाउंडI
सीएचसी चकराता में अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट दोनों ही नहीं हैं। सीएचसी साहिया में 2014 में अल्ट्रासाउंड मशीन मुहैया करवाई गई, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से 2018 में पद समाप्त कर दिया गया। मशीन को भी दूसरे अस्पताल में भेज दिया। वहीं, सीएचसी सहसपुर में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। अब अस्पताल के एक मेडिकल अफसर रेडियोलॉजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौट आए हैं, लेकिन मशीन का अब तक दोबारा पंजीकरण नहीं हुआ है। वहीं, विशेष व्यवस्था के तौर पर त्यूणी को अल्ट्रासाउंड मशीन मुहैया करवाई गई। बीते पांच माह से मशीन खराब होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। अब मशीन ठीक हो गई है।
साहिया या चकराता में हो व्यवस्था तो मिले राहतस्वास्थ्य महानिदेशक की ओर सीएचसी साहिया में अल्ट्रासाउंड की जरूरत को लेकर सीएमओ और प्रभारी चिकित्साधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई थी। डीजी को रिपोर्ट भेज दी गई है। अगर सीएचसी साहिया या चकराता को अल्ट्रासाउंड मशीन मिल जाए तो उप जिला अस्पताल पर दबाव कम होगा। सप्ताह में एक दिन उप जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को सीएचसी भेजा जा सकता है। सीएचसी साहिया के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने भी पूर्व में यह सुझाव स्वास्थ्य विभाग को भेजा था।
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I- उप जिला अस्पताल में रोस्टर सिस्टम से प्रतिदिन हो रहे महज 20 अल्ट्रासाउंड
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I- 60 गर्भवती महिलाएं और मरीज पहुंचते हैं प्रतिदिन, सात से आठ दिन बाद की दी जा रही तारीखI
उप जिला अस्पताल विकासनगर में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए गर्भवती महिलाओं और मरीजों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मरीजों को सात से आठ दिन बाद की तारीख दी जा रही है। इसका मुख्य कारण मरीजों की अधिकता और सीमित संख्या में जांच होना है।
पछवादून और जौनसार बावर क्षेत्र में एक उप जिला अस्पताल और तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से केवल उप जिला अस्पताल विकासनगर में ही अल्ट्रासाउंड जांच होती है। रोस्टर सिस्टम से सप्ताह में तीन दिन गर्भवती और तीन दिन पेट संबंधी रोगों के मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच होती है। अस्पताल में जांच के लिए रोजाना 60 गर्भवती महिलाएं और मरीज पहुंचते हैं। त्यूणी, चकराता, साहिया, कालसी, विकासनगर, सहसपुर के साथ सीमांत हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल से मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए उप जिला अस्पताल ही आते हैं। कभी-कभी मरीजों की संख्या 100 तक भी पहुंच जाती है।
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वहीं, अस्पताल में प्रतिदिन महज 20 अल्ट्रासाउंड जांच ही की जाती हैं। बाकी मरीजों को जांच की तिथि देकर वापस भेज दिया जाता है। ऐसे में दूर दराज के क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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Iत्यूणी में मशीन है पर नहीं होते अल्ट्रासाउंडI
सीएचसी चकराता में अल्ट्रासाउंड मशीन और रेडियोलॉजिस्ट दोनों ही नहीं हैं। सीएचसी साहिया में 2014 में अल्ट्रासाउंड मशीन मुहैया करवाई गई, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से 2018 में पद समाप्त कर दिया गया। मशीन को भी दूसरे अस्पताल में भेज दिया। वहीं, सीएचसी सहसपुर में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के चलते अल्ट्रासाउंड मशीन का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। अब अस्पताल के एक मेडिकल अफसर रेडियोलॉजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर लौट आए हैं, लेकिन मशीन का अब तक दोबारा पंजीकरण नहीं हुआ है। वहीं, विशेष व्यवस्था के तौर पर त्यूणी को अल्ट्रासाउंड मशीन मुहैया करवाई गई। बीते पांच माह से मशीन खराब होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हुए। अब मशीन ठीक हो गई है।
साहिया या चकराता में हो व्यवस्था तो मिले राहतस्वास्थ्य महानिदेशक की ओर सीएचसी साहिया में अल्ट्रासाउंड की जरूरत को लेकर सीएमओ और प्रभारी चिकित्साधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई थी। डीजी को रिपोर्ट भेज दी गई है। अगर सीएचसी साहिया या चकराता को अल्ट्रासाउंड मशीन मिल जाए तो उप जिला अस्पताल पर दबाव कम होगा। सप्ताह में एक दिन उप जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को सीएचसी भेजा जा सकता है। सीएचसी साहिया के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने भी पूर्व में यह सुझाव स्वास्थ्य विभाग को भेजा था।