उत्तराखंड: 2 माह से व्यास और दारमा घाटी को जाने वाला मार्ग बंद, रिस्क पर वहां रहने वालों का जीवन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपदा की मार झेल रहे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में व्यास और दारमा घाटी के लोग जान जोखिम में डालकर गुजर-बसर कर रहे हैं।
धारचूला के व्यास और दारमा घाटी को जाने वाले मार्ग भारी बारिश से क्षतिग्रस्त होने के कारण करीब दो माह से बंद पड़े हैं। लीपूलेख के लिए बन रही सड़क की कटिंग से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पैदल मार्ग भी चलने लायक नहीं है। इसको देखते हुए कैलाश यात्रा का संचालन पिथौरागढ़ से सीधे गुंजी तक वायु सेना के हेलीकॉप्टर से किया जा रहा है।
व्यास और दारमा घाटी को जाने वाले लोगों के लिए धारचूला में हेलीकॉप्टर तैनात किया गया है। इसका इस्तेमाल उच्च हिमालयी क्षेत्र में फंसे लोगों को धारचूला लाने और आपदा में घायलों को अस्पताल पहुंचाने में किया जा रहा है।
हेली कंपनियों ने मचाई लूट
इसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाना ही कहा जाएगा। रास्ता है नहीं और व्यास घाटी में विशेष पूजा के कारण लोगों को वहां जाना ही है। ऐसे में लोग हेली सेवाओं का लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं और उनसे वापसी का 3100 रुपये किराया वसूला जा रहा है।
नजंग में रास्ता खराब होने से व्यास घाटी के लिए आवाजाही नहीं हो पा रही है। इन दिनों व्यास घाटी में विशेष पूजा हो रही है। लोगों को घाटी तक पहुंचाने के लिए एक हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गई है। इसका एक तरफ का किराया 3100 रुपये है। आपदा को देखते हुए पहले वापसी का किराया नहीं लिया जाता था।
अब शासन ने वापसी का भी किराया 3100 रुपये तय कर दिया है। लोगों का कहना है कि या तो प्रशासन नजंग के लिए रास्ता बनाकर दें, अन्यथा एक तरफ का किराया माफ करे।