300 करोड़ के घोटाले में PCS अधिकारी समेत तहसीलदार गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला
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उत्तराखंड में 300 करोड़ के घोटाले में संलिप्त पीसीएस अधिकारी और प्रभारी तहसीलदार को पुलिस ने दबिश कर गिरफ्तार कर लिया। एनएच 74 भूमि मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने निलंबित एसडीएम अनिल शुक्ला और प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह बिष्ट को गिरफ्तार कर लिया है।
एसआईटी ने दोनों आरोपियों को नैनीताल जिला कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। वहीं बाजपुर के चकबंदी अधिकारी के पैर में चोट होने के कारण उसकी गिरफ्तारी रोक दी गई है।
मार्च 2017 में भूमि मुआवजा घोटाला उजागर होने के बाद मामले की जांच को गठित एसआईटी ने काशीपुर और जसपुर तहसील की जांच के बाद तत्कालीन एसएलओ, निलंबित पीसीएस अफसर डीपी सिंह, एसडीएम भगत सिंह फोनिया सहित 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
एसआईटी ने बाजपुर तहसील की जांच की तो पता चला कि 12 मामलों में तत्कालीन एसडीएम अनिल शुक्ला ने चकबंदी अधिकारियों की ओर से तैयार की गई 143 की रिपोर्ट को आधार बनाकर काश्तकारों को कई गुना प्रतिकर भुगतान कर दिया था।
इस तहसील चकबंदी प्रक्रिया के अधीन आती है और काश्तकारों की भूमि का 143 भी पिछली तिथियों में कराया गया था। सितारगंज तहसील की जांच में एसआईटी को साक्ष्य मिले कि सितारगंज में रजिस्ट्रार कानूनगो रहते हुए प्रभारी तहसीलदार लालकुआं मोहन सिंह बिष्ट ने भी पिछली तिथियों में कराई गई 143 में अपनी जांच रिपोर्ट लगाई थी।
तीन पीसीएस गिरफ्तार, तीन का इंतजार
लेकिन, एसआईटी को दिए बयान में मोहन सिंह ने दस्तावेजों में उनके फर्जी हस्ताक्षर होने की बात कही थी। इसके बाद उनके दस्तखतों को जांच के लिए एसआईटी ने देहरादून एफएसएल भेजा, जहां दस्तखत मोहन सिंह के ही होने की पुष्टि हुई।
एसआईटी प्रभारी कमलेश उपाध्याय ने बताया कि दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने के बाद एसआईटी ने बीती रविवार देर रात कलक्ट्रेट स्थित आवास से निलंबित एसडीएम अनिल शुक्ला और काशीपुर स्थित आवास से प्रभारी तहसीलदार मोहन सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
सोमवार को दोनों को मेडिकल के बाद नैनीताल कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। बाजपुर तहसील में ही घोटाले के मामले में चकबंदी अधिकारी अमर सिंह की गिरफ्तारी के लिए भी एसआईटी ने उनके घर पर दबिश दी, लेकिन अमर सिंह के पैर में फैक्चर होने के कारण एसआईटी खाली हाथ लौट गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि अमर सिंह भी जल्द एसआईटी की गिरफ्त में होंगे।
रुद्रपुर। मार्च में तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन की ओर से एनएच 74 भूमि मुआवजा घोटाला उजागर करने के बाद शासन के आदेश पर छह पीसीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
एसआईटी इनमें से अब तक पूर्व एसएलओ डीपी सिंह, एसडीएम भगत सिंह फोनिया और अनिल शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। घोटाले में लिप्त अभी और तीन पीसीएस अधिकारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।