आखिर क्यों? वापस लौट गए चिदंबरम के स्वागत को आए कांग्रेसी
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आबकरी नीति पर फजीहत झेल रही उत्तराखंड कांग्रेस को बृहस्पतिवार को बड़ी विचित्र स्थिति का सामाना करना पड़ा। सरकार के खिलाफ दो शराब कंपनियों की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका की पैरवी खुद पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम ने की।
कंपनियों के पक्ष में आया फैसला
स्वागत के लिए पहुंच कांग्रेसियों को मालूम पड़ा कि चिदंबरम अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ पैरवी के लिए पहुंचे हैं तो कार्यकर्ता उनसे मिले बगैर ही चुपचाप लौट गए। यही नहीं चिंदबरम की पैरोकारी का ही दम है कि शराब कंपनियों को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई।
चिदंबरम बृहस्पतिवार को राज्य सरकार के खिलाफ निजी कंपनी यूनाईटेड स्प्रीट लिमिटेड व परनोड रिकार्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका की पैरवी करने दिल्ली से हाईकोर्ट आए थे। चिदंबरम को इन कंपनियों ने हाईकोर्ट में पैरवी के लिए अपना वकील नियुक्त किया है।
इधर, कांग्रेसियों को जानकारी मिली कि चिदंबरम नैनीताल में बार एसोसिएशन के किसी कार्यक्रम में शामिल होने आए हैं तो वह उनसे मुलाकात करने चले गए। लेकिन हाईकोर्ट पहुंचने पर कांग्रेसियों को हकीकत पता चली तो उनके सामने मुंह छिपाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। वे बिना स्वागत किए ही वहां से चुपचाप खिसक लिए।
सच जानकर उलटे पांव लौटे स्वागत के लिए पहुंचे कांग्रेसी
इस संबंध में चिदंबरम से मुलाकात करने आए कांग्रेसियों से संपर्क साधा गया तो किसी ने भी अपना नाम उजागर करने से साफ मना कर दिया। एक कांग्रेसी नेता ने दबी जुबान से यहां तक कहा कि कंपनियों की पैरवी के लिए पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पी चिदंबरम यहां आए हैं पर उनका अपनी ही सरकार से लड़ना ठीक नहीं है।
इससे आने वाले चुनावों में प्रदेश सरकार को नुकसान हो सकता है। शायद यही वजह रही कि चिदंबरम हल्द्वानी से लेकर नैनीताल तक मीडिया से दूरी बनाए रहे और यहां तक कि उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को हूटर बजाने से भी मना कर दिया। एक होटल में टिके तो वहां भी किसी से मुलाकात नहीं कराने के निर्देश दिए थे।
बता दें कि प्रदेश सरकार ने इसी साल आबकारी नीति लागू कर मंडी परिषद शराब बेचने का अधिकार दिया है। इसी नीति के तहत हुए समझौते को लेकर कंपनियों ने सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।