उत्तराखंड में कोरोना का एक सालः संक्रमण को रोकने के लिए दीवार बन गए थे गांव के ही लोग
कोविडकाल में जब उत्तराखंड का मैदानी भूभाग संक्रमण की जद में लगातार फंसता जा रहा था, पर्वतीय जिले पूरी तरह से निश्चिंत हो ये सारा तमाशा देख रहे थे। उन्हें एहसास तक नहीं था कि कोरोना संक्रमण कब किस कोरोना कैरियर पर सवार होकर पहाड़ चढ़ जाएगा।
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आखिरकार खतरे की वह घड़ी आई जब मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, गुजरात से हजारों की संख्या में प्रवासियों ने पहाड़ का रुख किया। देखते ही देखते पहाड़ कोरोना संक्रमण की जद में आ गए। लेकिन स्थानीय लोगों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दीवार का काम किया। उन्होंने अपने करीब से करीब रिश्तेदार को भी गांव की दहलीज तभी पार करने दी जब उसने 14 दिन की क्वारंटीन अवधि पूरी की।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 15 मार्च को देहरादून में मिला था। पर्वतीय जनपदों में पौड़ी जिले के कोटद्वार में पहला केस 25 मार्च को मिला। इसके बाद चार मैदानी जिले देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले में संक्रमण के मामले बढ़ते गए।
पर्वतीय जिले बागेश्वर, चमोली, टिहरी, चंपावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग जिले में पहला संक्रमित मामला 15 मई के बाद ही मिले। सरकार को इस बात की चिंता थी कि पहाड़ में संक्रमण न पहुंचे। इसके पीछे यह भी वजह थी कि पहाड़ों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सैंपल जांच और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था।
सरकार ने कोविड महामारी में दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को घर पहुंचाने का निर्णय लिया। प्रवासियों के रुख करते ही पहाड़ों में तेजी से संक्रमण फैल गया। स्थानीय लोगों, सरकार व प्रशासन की सतर्कता से पहाड़ में संक्रमण की स्थिति मैदानी जिलों की तरह नहीं रही।
प्रदेश और जनपद की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा कर बाहर से आने वाले हर व्यक्ति को 14 दिन का क्वारंटीन किया गया। वहीं, गांव के लोगों ने बिना क्वारंटीन के घर आने वालों की सूचना प्रशासन की दी। जिससे संक्रमण को फैलने से रोका गया।
पहाड़ों में 35 प्रतिशत और मैदानों में 65 प्रतिशत जांच
कोविड काल के एक साल के भीतर प्रदेश में 25.99 लाख से अधिक सैंपलों की जांच की गई। इसमें नौ पर्वतीय जिलों में 904156 (35 प्रतिशत) सैंपल और चार मैदानी जिलों में 16.95 (65 प्रतिशत) लाख से ज्यादा सैंपलों की जांच की गई।
एक साल में नौ जिलों में मिले 28973 संक्रमित
कोरोना महामारी के एक साल में उत्तराखंड में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 98129 पहुंच गया है। इसमें नौ पर्वतीय जिलों में 28973 संक्रमित मिले हैं। जो कुल संक्रमितों का 30 प्रतिशत है। जबकि मैदानी जिलों में 69156 संक्रमित यानी 70 प्रतिशत मामले हैं।
पहाड़ों में 22 प्रतिशत कम रही संक्रमण दर
सैंपल जांच के आधार पर मैदानी जिलों की तुलना में पहाड़ों में संक्रमण दर की 22 प्रतिशत कम रही है। हालांकि अधिकतर पर्वतीय जिलों में आरटीपीसीआर जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पहाड़ों से सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए मेडिकल कालेज श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून और एम्स ऋषिकेश भेजे गए।
पर्वतीय जिलों में कम हुई कोरोना मरीजों की मौतें
कोरोना महामारी से एक साल में 1704 कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हुई है। नौ पर्वतीय जिलों में 218 कोरोना मरीजों और चार मैदानी जिलों में 1486 कोरोना मरीजों की मौत हुई है। पहाड़ों में मृत्यु दर 0.75 प्रतिशत और मैदानी जिलों में 2.15 प्रतिशत रही है।
प्रदेश में सबसे पहले मैदानी क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण फैला है। पर्वतीय क्षेत्रों में संक्रमण को रोकने के लिए हर जिला व ब्लाक स्तर पर क्वारंटीन सेंटर बनाए गए। बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को 14 दिन का क्वारंटीन अवधि पूरी करने के बाद घर भेजा गया। इसमें स्थानीय लोगों का काफी सहयोग मिला। जिससे पहाड़ों में कोरोना को नियंत्रण किया गया।
-डॉ. पंकज कुमार पांडेय, प्रभारी सचिव, स्वास्थ्य
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में शुरूआत में कोरोना संक्रमण नहीं फैला था। महामारी से बाहरी राज्यों से लौटे प्रवासियों से पहाड़ों में संक्रमण ने दस्तक दी है। स्थानीय लोगों में संक्रमण को लेकर सुरक्षा की चिंता थी और इसके लिए एकजुटता दिखाई। शहरों के लोगों में इस तरह की सतर्क नहीं दिखी। फिर से संक्रमण टायर टू व टायर थ्री शहरों की तरफ फैल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसे लेकर राज्यों को निगरानी और जांच बढ़ाने को कहा है।
-अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, सोशल डवलपमेंट फार कम्युनिटी फाउंडेशन
संक्रमण रोकने को ये कदम उठाए
-बाहर राज्यों से आने वाले लोगों को 14 दिन का क्वारंटीन
-संक्रमित मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों की ट्रेसिंग
-आरटीपीसीआर कोविड जांच के लिए लैब क्षमता बढ़ाई
-क्वारंटीन नियमों का पालन न करने वालों पर कोविड एक्ट के तहत कार्रवाई
-मास्क, सोशल डिस्टेसिंग, सैनिटाइजेशन का सख्ती से पालन
-संक्रमण रोकने के लिए जिलाधिकारियों को दिए अधिकार
-राज्य स्तर से लेकर ब्लाक व पंचायत स्तर पर निगरानी
किस जिले में कब मिला पहला कोरोना संक्रमित
जिला - पहला संक्रमित मामला
देहरादून - 15 मार्च 2020
ऊधमसिंह नगर - 02 अप्रैल
हरिद्वार - 04 अप्रैल
नैनीताल - 04 अप्रैल
पौड़ी - 25 मार्च
अल्मोड़ा - 06 अप्रैल
उत्तरकाशी - 07 मई
बागेश्वर - 19 मई
चमोली - 19 मई
टिहरी - 20 मई
चंपावत - 23 मई
पिथौरागढ़ - 23 मई
रुद्रप्रयाग - 23 मई
प्रदेश में एक साल में इस तरह बढ़ा संक्रमण
तारीख - संक्रमित मामले
15 मार्च 2020 - 01
25 अप्रैल 2020 - 48
30 मई 2020 - 749
27 जून 2020 - 2791
25 जुलाई 2020 - 5961
29 अगस्त 2020 - 18571
26 सितंबर 2020 - 46281
31 अक्तूबर 2020 - 62328
28 नवंबर 2020 - 73951
31 दिसंबर 2020 - 90920
31 जनवरी 2021 - 96129
28 फरवरी 2021 - 96992
18 मार्च 2021 - 98129
प्रदेश में जिलावार संक्रमित, ठीक हुए मरीज और मौतों पर एक नजर
जिला - संक्रमित - ठीक हुए - मरीजों की मौतें
अल्मोड़ा - 3275 - 3097 - 26
बागेश्वर - 1544 - 1495 - 17
चमोली - 3490 - 3384 - 15
चंपावत - 1822 - 1790 - 09
देहरादून - 30079 - 28492 - 971
हरिद्वार - 14479 - 13893 - 161
नैनीताल - 12945 - 12533 - 237
यूएस नगर - 11653 - 11351 - 117
पौड़ी - 5153 - 5030 - 60
पिथौरागढ़ - 3372 - 3306 - 48
रुद्रप्रयाग - 2277 - 2253 - 10
टिहरी - 4247 - 4041 - 16
उत्तरकाशी - 3793 - 3646 - 17
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कुल- 98129 - 94311 - 1704