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पुराने नोटों का प्रचलन पूरी तरह से बंद, सहकारी बैंकों के खाताधारक हुए बेगाने

Fri, 18 Nov 2016 09:57 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 18 Nov 2016 09:57 AM IST
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old currency ban in cooperative banks
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आरबीआई के एक आदेश की वजह से जिला सहकारी बैंकों के 12 लाख ग्राहक खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं।

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उनके सामान्य बैंक खाते वाले साथियों के खातों में तो लोन से लेकर हर काम में 500 और 1000 रुपये के नोट जमा हो रहे हैं लेकिन उनके खातों में न तो यह नोट जमा हो रहे हैं और न ही लोन की किस्त भरी जा रही है। बैंक भी परेशान हैं, आखिर लोन की किस्त ओवरडेट हुई तो इसका जुर्माना कौन भरेगा।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में सभी जिला सहकारी बैंकों में 500-1000 रुपये के नोटों का प्रचलन पूरी तरह से बंद कर दिया। दो दिन से लोग यहां पुराने नोट लेकर अपने खाते में जमा कराने, लोन की किस्त जमा कराने जैसे काम को आ रहे हैं लेकिन बैंक नियमों में बंधे होने की वजह से पुराने नोट स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
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जिला सहकारी बैंक में पुराने नोट लेकर लोन की किस्त जमा कराने पहुंचे नेशविला रोड निवासी मुकेश ने कहा कि उनके आस पड़ोस के लोगों के सामान्य बैंकों में खाते हैं और वह आसानी से पैसा जमा करा पा रहे हैं। लोन की किस्तों में भी दूसरे बैंक उनके 500-1000 रुपये के नोट चला रहे हैं लेकिन हमारे बैंक में यह सुविधा बंद होने की वजह से संकट पैदा हो गया है।
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उन्होंने बताया कि उनके पास इस वक्त नई करेंसी नहीं है, ऐसे में अगर लोन के भुगतान का समय निकल गया तो इसका जुर्माना कौन भरेगा। जिला सहकारी बैंक के मैनेजर जेएस बिष्ट ने बताया कि उनके बैंक को आरबीआई से लाइसेंस मिला हुआ है। ऐसे में ग्राहक भी उनसे लगातार यही सवाल कर रहे हैं। प्रदेशभर में जिला सहकारी बैंकोें में 12 लाख खाताधारक हैं। वह सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं।

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