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Dehradun News: भालू से फसलों को होने वाले नुकासान का मुआवजा देेने का आदेश नहीं हुआ जारी
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- शासन ने वन मुख्यालय के भेजे गए प्रस्ताव पर कई जानकारी मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भालू से फसलों को होने वाली क्षति और सियार के हमले में मानव को नुकसान पर मुआवजा देने की व्यवस्था अभी तक लागू नहीं हो पाई है। वन मुख्यालय ने इस संबंध में शासन को एक प्रस्ताव भेजा था। शासन ने उस प्रस्ताव पर कई महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है।
वन विभाग वन्यजीवों से मानव मृत्यु, घायल होने, पशु क्षति और फसल नुकसान के लिए मुआवजा प्रदान करता है। इसमें हाथी, जंगली सूअर और बंदर जैसे वन्यजीवों द्वारा फसल क्षति पर मुआवजा शामिल है। लेकिन भालू से होने वाली फसल क्षति पर मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए वन मुख्यालय ने करीब चार महीने पहले शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन ने मुआवजे पर होने वाले व्यय और क्षति के आकलन जैसे कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। वन मुख्यालय अभी इन सवालों का जवाब तैयार कर रहा है। इसी तरह, लोमड़ी से मानव को होने वाले नुकसान के लिए भी मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव लंबित है। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि भालू से फसल के नुकसान का प्रस्ताव भेजा गया था, अभी इसका आदेश होना बाकी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। भालू से फसलों को होने वाली क्षति और सियार के हमले में मानव को नुकसान पर मुआवजा देने की व्यवस्था अभी तक लागू नहीं हो पाई है। वन मुख्यालय ने इस संबंध में शासन को एक प्रस्ताव भेजा था। शासन ने उस प्रस्ताव पर कई महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है।
वन विभाग वन्यजीवों से मानव मृत्यु, घायल होने, पशु क्षति और फसल नुकसान के लिए मुआवजा प्रदान करता है। इसमें हाथी, जंगली सूअर और बंदर जैसे वन्यजीवों द्वारा फसल क्षति पर मुआवजा शामिल है। लेकिन भालू से होने वाली फसल क्षति पर मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए वन मुख्यालय ने करीब चार महीने पहले शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन ने मुआवजे पर होने वाले व्यय और क्षति के आकलन जैसे कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। वन मुख्यालय अभी इन सवालों का जवाब तैयार कर रहा है। इसी तरह, लोमड़ी से मानव को होने वाले नुकसान के लिए भी मुआवजा दिए जाने का प्रस्ताव लंबित है। इस संबंध में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव रंजन मिश्रा ने बताया कि भालू से फसल के नुकसान का प्रस्ताव भेजा गया था, अभी इसका आदेश होना बाकी है।
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