देवभूमि में भी बेटियों पर कम नहीं हो रहे अपराध, पांच साल में 1779 बच्चियां बनी दरिंदगी का शिकार
निर्भया कांड के बाद सख्त हुए कानून से माना जा रहा था कि अपराधों में कमी आएगी, मगर कांड के बाद से अब तक प्रदेश में कुल 1779 बच्चियां दरिंदगी का शिकार हुई हैं। हालांकि सुकून की बात यह है कि दुष्कर्मियों को सजा दिलाने में खासी तेजी आई है।
इन पांच सालों में 366 अपराधियों को कानून सजा दे चुका है। राजधानी देहरादून में ही पिछले एक साल में दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में तीन लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
2012 के 16 दिसंबर की रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ दरिंदों ने जो कुछ किया, उससे पूरा देश हिल गया था। घटना के बाद देश में आए उबाल से दरिंदों के खिलाफ सख्ती हुई। उन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया।
इसके बाद से दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाए जाने की बहस भी शुरू हो गई। नाबालिग बच्चियों को दरिंदगी का शिकार बनने वालों के खिलाफ पोेक्सो कानून बना और देश भर में फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन कर कड़ी सजा दिलाने का प्रावधान हुआ ।
आंकड़ों की स्थिति
ऐसा माना जा रहा था कि कानून बनने के बाद अपराधों में कमी आएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि अपराधों में लगातार बढ़ोतरी ही होती जा रही है। प्रदेश में भी कमोबेश यही स्थिति है।
वर्ष केस दर्ज सजा लंबित
2013 101 18 28
2014 304 31 58
2015 290 54 96
2016 338 93 372
2017 440 123 495
2018 (जून तक) 306 47 520
कुल 1779 366 1569