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नदी किनारे कूड़ा डंपिंग पर एनजीटी नाराज, छह माह में ट्रंचिंग ग्राउंड हटाने के दिए निर्देश

Sat, 08 Jun 2019 06:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 08 Jun 2019 06:51 PM IST
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NGT angry on riverbank garbage dumping in srinagar garhwal
फाइल फोटो

एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) की टीम ने अलकनंदा नदी किनारे नगर पालिका का ट्रंचिंग ग्राउंड होने पर नाराजगी जतायी है। टीम ने कूड़ा हटाने के निर्देश दिए। पालिका ने बताया कि दूसरे स्थान पर ट्रंचिग ग्राउंड बनाया जाना है। धीरे-धीरे कूड़े को हटा दिया जाएगा। 

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एनजीटी की 5 सदस्यीय टीम ने श्रीनगर में अलकेश्वर घाट के समीप अस्थायी ट्रंचिंग ग्राउंड का निरीक्षण किया। टीम ने नदी और बस्ती के समीप कूड़े को डंप करने पर नाराजगी जतायी। सदस्यों ने कहा कि एक ओर अलकनंदा नदी है और दूसरी ओर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, बस्ती, 132 केवी सबस्टेशन और उद्यान विभाग की नर्सरी है। ऐसे में यहां कूड़ा जमा किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने तत्काल कूड़े को हटाने के निर्देश दिए।

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नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी एसएन गुप्ता ने बताया कि सुरक्षित स्थान पर स्थायी ट्रंचिंग ग्राउंड का निर्माण किया जाना है। इसके बाद वहीं कूड़ा जमा किया जाएगा। जिस पर सदस्यों ने कहा कि छह माह के भीतर कूड़ा निस्तारण की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। 

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एनजीटी ने ऊर्जा विभाग और डीएम से मांगी रिपोर्ट
एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की शक्ति नहर (पावर चैनल) मामले में ऊर्जा विभाग, जिलाधिकारी टिहरी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा है। तीनों को एक माह के अंदर एनजीटी को मेल करके बताना होगा कि शक्ति नहर से लीकेज मामले में उनकी ओर से क्या कार्रवाई की गई। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की नहर के ट्रीटमेंट के लिए पर्याप्त कदम न उठाए जाने पर जिला पंचायत सदस्य चौरास उत्तम भंडारी और माटू जन संगठन के विमल भाई ने विगत मार्च माह में एनजीटी में याचिका दाखिल की थी।

यचिकाकर्ताओं का कहना है कि चौरास क्षेत्र से गुजर रही नहर से वर्ष 2015 में पानी का खतरनाक तरीके से रिसाव हुआ था। इससे काफी नुकसान हुआ। 30 दिसंबर 2015 को वाडिया इंस्टीट्यूट ने  रिपोर्ट देते हुए नहर को भूवैज्ञानिकों के परामर्श से पुन: सुदृढ़ बनाने और ढांचे के डिजायन की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की थी, लेकिन सुझाव के अनुसार अपेक्षित काम न होने की वजह से पुन: रिसाव हुआ। सरकार की ओर से मजबूत कदम न उठाए जाने पर उन्होंने एनजीटी में याचिका दाखिल की। 


23 मई को एनजीटी ने इस मामले में  सुनवाई की। अब एनजीटी ने अगली सुनवाई से पहले ऊर्जा विभाग उत्तराखंड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिलाधिकारी टिहरी को रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस मामले में अनुपालन एवं समन्वय की जिम्मेदारी दी है। भंडारी और विमल भाई ने बताया कि एनजीटी ने याचिका की कॉपी तीनों को एक सप्ताह में पहुंचाने के आदेश दिए थे। आदेश के अनुपालन में याचिका की कॉपी प्रतिवादियों को दे दी गयी है।

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