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हाईकोर्ट ने दिए श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को हटाने के निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Updated Tue, 14 Aug 2018 09:34 PM IST
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : PTI
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नैनीताल हाईकोर्ट ने टिहरी जिले की श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के पॉवर हाउस परिसर में धरना प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को तुरंत हटाने के निर्देश एसएसपी टिहरी को दिए हैं। कोर्ट ने पावर प्रोजेक्ट को सुरक्षा देने के निर्देश देते हुए सरकार से 21 अगस्त तक जवाब देने को कहा है।
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न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अलकनंदा हाइड्रो पॉवर कंपनी लिमिटेड (एएचपीसीएल) और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि श्रीनगर व उसके आसपास के लोग मुआवजे को लेकर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।
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याचिका में कहा कि एक अगस्त 2018 को दौलत कुमार, राजेंद्र कुमार मुयाल, जयकृष्ण भट्ट, आयुष मियां, महावीर घिल्डियाल और उत्तम सिंह भंडारी ने कंपनी के किलकिलेश्वर स्थित पॉवर हाउस में अतिक्रमण कर तोड़फोड़ कर विद्युत उत्पादन बंद करने के प्रयास किया गया और अनियंत्रित भीड़ ने (लगभग 100 पुरुष और 25 महिलाएं) कंपनी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सुरक्षा अधिकारी यादराम शर्मा, प्रोजेक्ट समन्वक संतोष रेड्डी और अन्य के साथ मारपीट की।
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संतोष रेड्डी को बंधक भी बना लिया जिसकी एफआईआर सहायक महाप्रबंधक अलकनंदा हाईड्रो पावर कंपनी लिमिटेड वाईआर शर्मा ने दो अगस्त 2018 को दर्ज कराई थी। याचिका में कहा कि उनकी एफआईआर पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और आज भी वे लोग उनकी कंपनी को घेरे बैठे हैं।
एएचपीसीएल ने अदालत को बताया कि उसने 12 करोड़ से अधिक रुपये मुआवजे के रूप में ग्रामीणों को बांटे हैं। साथ ही प्रोजेक्ट में काम कर रहे सात सौ में से छह सौ ग्रामीणों को रोजगार दिया गया है। इसके बावजूद कुछ ग्रामीण एएचपीसीएल को ब्लैकमेल कर रहे हैं और प्रोजेक्ट के गेट पर रोज धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।