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उत्तराखंड: 23 निकायों के सीमा विस्तार की अधिसूचना रद्द, फैसले के खिलाफ डबल बेंच जाएगी सरकार

Mon, 14 May 2018 10:44 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Mon, 14 May 2018 10:44 PM IST
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 Nainital High court decision for nikay chunav 2018 notification
nainital high court - फोटो : google

हाईकोर्ट ने 23 नगर निकायों के सीमा विस्तार पर पांच अप्रैल को जारी राज्य सरकार की अंतिम अधिसूचना को सोमवार को रद्द कर दिया है। अधिसूचनाएं राज्यपाल की जगह शहरी विकास सचिव के स्तर पर किए जाने को फैसले का आधार बनाया गया है। 

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सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट के डबल बेंच में चुनौती देने का फैसला किया है। सरकार ने साफ किया है कि उसने इस मामले उसी प्रक्रिया को अपनाया है, जो राज्य बनने के बाद से अपनाई जा रही है। सीमा विस्तार को लेकर इस मुकदमे बाजी से पहले से विलंबित निकाय चुनावों का और लटकना तय हो गया।
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न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकल पीठ ने आठ मई को इस मामले की सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। कोटद्वार में मवाकोट के 35 ग्राम सभाओं सहित भवाली, डोईवाला, तिलवाडा, हल्द्वानी, काशीपुर, टनकपुर और पिथौरागढ़ सहित दो दर्जन से अधिक निकायों के सीमा विस्तार के मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें पांच अप्रैल 2018 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी।
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याचिकाओं में कहा गया था कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्यपाल ही किसी क्षेत्र को निकायों में शामिल करने के लिए अधिकृत हैं और प्रावधान द्वारा प्रदत शक्ति किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं की जा सकती है। सरकार की ओर से तब कहा गया था कि उसके स्तर पर किया गया कोई भी कार्य राज्यपाल द्वारा किया गया ही माना जाता है। इस पर सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने पांच अप्रैल को जारी सरकार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया।

फैसले के खिलाफ डबल बेंच जाएगी सरकार

 Nainital High court decision for nikay chunav 2018 notification

सरकार के सारे फैसले राज्यपाल की स्वीकृति के आधार पर ही होते हैं। जिस तरह का बिजनेस रूल है, उसमें यह तय है कि कौन सी फाइल राजभवन भेजी जाएगी और कौन नहीं। सारी फाइलें राजभवन नहीं भेजी जा सकती हैं। सरकार राज्यपाल के नाम से ही चलती है। कांग्रेस का शासन रहा हो या भाजपा का ऐसा ही होता आया है। हम इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं।
-मदन कौशिक, नगर विकास मंत्री, उत्तराखंड।

हाईकोर्ट का आदेश जब तक हमारे पास नहीं आ जाता, तब तक कुछ भी बोलना मुनासिब नहीं है। विभाग ने जल्द चुनाव कराने के लिए अपने स्तर पर सारे प्रयास किए हैं। अब क्या स्थिति बनती है, फिलहाल कहा नहीं जा सकता।
-आरके सुधांशु, नगर विकास सचिव, उत्तराखंड।

फैसले के खिलाफ डबल बेंच जाएगी सरकार

नगर निकायों के परिसीमन को रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले को सरकार चुनौती देगी। सरकार ने इस मामले को डबल बेंच में ले जाने का निर्णय लिया है। रुद्रपुर परिसीमन के मामले में कुछ दिन पहले ही सरकार को डबल बेंच में जाने के बाद सफलता मिली थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि रुद्रपुर निकाय के परिसीमन की अधिसूचना करते हुए सरकार आरक्षण प्रक्रिया शुरू कर सकती है।

पिछले करीब नौ महीने से सरकार चुनाव से पूर्व की प्रक्रिया में उलझी हुई है। इस बार व्यापक स्तर पर निकायों का सीमा विस्तार हुआ, तो उसी अनुपात में हाईकोर्ट तक याचिकाएं भी पहुंच गईं। नतीजा ये हुआ कि तीन मई तक नगर निकाय चुनाव नहीं हो पाए और प्रशासक राज कायम हो गया। सीमा विस्तार और फिर परिसीमन के मसले में इतने पेंच फंस गए हैं कि फिलहाल ये मामला बेहद उलझा दिख रहा है।

इन स्थितियों के बीच, ये माना जा रहा था कि 23 नगर निकायों में सीमा विस्तार और परिसीमन की प्रक्रिया दोबारा कर लिए जाने के बाद सरकार को राहत मिल जाएगी। ये भी अनुमान लगाया जा रहा था कि नगर निकाय चुनाव की राह अब बहुत मुश्किल नहीं रह गई है। मगर सोमवार को हाईकोर्ट के फैसले से सरकार को जोर का झटका लगा है। हाईकोर्ट का फैसला सोमवार को जिस वक्त आया, नगर विकास मंत्री मदन कौशिक अफसरों के साथ विधानसभा में नगर विकास की बैठक में थे। आनन-फानन में उन्होंने अफसरों से इस मसले पर चर्चा की और फिर सरकार का रुख साफ कर दिया।

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