कैदी नंबर 923 बन गया योग गुरु, पढ़िए एक हत्यारे में आए बदलाव की कहानी
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इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है। वर्तमान की अच्छाइयां अतीत की कड़वी यादों को भुला जरूर देती हैं, लेकिन पीछा नहीं छोड़ती। जिला कारागार का कैदी नंबर 923 राकेश ऐसा ही एक उदाहरण है।
राकेश हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। राकेश ने अपने कर्म से जेल के बंदियों से लेकर जेल अधीक्षक और कर्मचारियों को शिष्य बना दिया है। हर कोई उसकी योग प्रशिक्षक की प्रतिभा का कायल है और उसके इशारों पर योग करता है।
राकेश योग का बेहतरीन प्रशिक्षक है। बंदियों और कैदियों को रोजाना सामूहिक योग कराता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जेल प्रशासन ने उसे सम्मानित किया है।
2012 में ऋषिकेश में की थी हत्या
जेल प्रशासन के मुताबिक राकेश सिंह मूलरूप से चंदौसी का रहने वाला है। 2009 में चंदौसी छोड़कर वह हरिद्वार आ गया। हरिद्वार और ऋषिकेश में बिजली का काम करने लगा।
2012 में थाना ऋषिकेश क्षेत्र में उसने एक हत्या कर दी। 16 मार्च 2012 को वह जिला कारागार आया। 26 अक्तूबर 2013 को जमानत पर रिहा हो गया।
जमानत पर छूटने के बाद उसका मोह योग की तरफ हो गया। योग का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया। 29 अक्तूबर 2014 को हत्या के जुर्म में उसे आजीवन कारावास की सजा हो गई और दोबारा जिला कारागार पहुंच गया।
जेल में 1200 बंदी और कैदी
धीरे धीरे जेल का हर बंदी और कैदी उसे अपना गुरु मानने लगा। उसने रोजाना योग सिखाना शुरू कर दिया। जेल में 1200 बंदी और कैदी हैं। वह रोजाना सुबह उन्हें योग सिखाता है। जेल के कर्मचारी भी उससे नियमित योग सीखते हैं।
इग्नू से कर रहा बीए की पढ़ाई
राकेश ने कक्षा 9वीं से पढ़ाई छोड़ दी। कामकाज की तलाश में वह हरिद्वार आ गया। राकेश में पढ़ने की चाहत है। हाईस्कूल और इंटर पत्राचार से करने के बाद अब बीए की पढ़ाई वह इग्नू से कर रहा है। जेल प्रशासन हमेशा उसे प्रोत्साहित करता है।