'भाजपा नेता ने मुझे दिया था दो करोड़ रुपये और ऑडी का लालच'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयुर्वेद विवि के पूर्व रजिस्ट्रार मृत्युंजय मिश्रा ने दावा किया कि ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर से निलंबित छात्र पुलकित आर्य को बहाल कर दोबारा प्रवेश कराने के लिए उसके पिता भाजपा नेता एवं पूर्व दर्जाधारी राज्यमंत्री विनोद आर्य ने दो करोड़ रुपये नगद के साथ एक ऑडी कार देने का लालच दिया था।
यहीं नहीं उन्हें भाजपा में अपनी शक्ति का एहसास कराने और दबाव में लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और आरएसएस के कई दिग्गजों के साथ अपने फोटो भी व्हाट्सएप पर भेजे थे।
मुन्नाभाई प्रकरण में सामने आया नया मोड़
मुन्नाभाइयों को हायर कर बैक डोर से परीक्षा कराकर ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में प्रवेश लेने वालों को जांच कर निलंबित करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। हरिद्वार के भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य के निलंबन को वापस लेने के मामले में पूर्व रजिस्ट्रार मृत्युंजय मिश्रा ने नया खुलासा किया है।
पूर्व कुलसचिव की माने तो पुलकित को दोबारा से ऋषिकुल परिसर में प्रवेश दिलाने के लिए विनोद आर्य पूर्व वीसी को साथ लेकर उनसे मुलाकात करने आए थे। जब उन्होंने प्रवेश प्रक्रिया में किसी तरह की मदद से इंकार कर दिया तो विनोद आर्य ने दो करोड़ रुपये नगद देने के साथ एक ऑडी कार देने का लालच दिया।
पूर्व कुलसचिव की मानें तो उन्होंने किसी भी प्रकार का गिफ्ट लेने से इंकार कर दिया तो विनोद आर्य ने उनके व्हाट्सएप पर भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ खींचे गए अपने फोटो भेजे। कई महीने बीतने के बाद जब प्रदेश में भाजपा की सरकार आई तो 19 मार्च को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात का फोटो भेजा। इसके बावजूद जब पुलकित को प्रवेश नहीं दिया गया तो विनोद आर्य ने उन्हें धमकी दी थी कि अब तो हम एडमिशन करा ही लेंगे।
पूर्व कुलसचिव ने बताया कि फिलहाल जिस तरह से पुलकित के प्रवेश की बात सामने आई है इस पर कार्यवाहक कुलपति प्रो. सौदान सिंह ने सभी नियमों की धज्जियां उड़ाकर रख दी है। ऋषिकुल में डीन के साथ निदेशक को हटाया और फिर जूनियर प्रोफेसर प्रो. सुनील जोशी को निदेशक बनाते हुए पुलकित का एडमिशन कराया।
दागी छात्रों के प्रवेश को लेकर कक्षाओं में पढ़ाने का निर्देश
डा. मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि 30 मार्च तक उनके पास विश्वविद्यालय के कुलसचिव का चार्ज था, लेकिन जिस तरह से कार्यवाहक कुलपति ने उनकी जानकारी के बिना सीधे ही 29 मार्च को ऋषिकुल परिसर निदेशक को दागी छात्रों के प्रवेश को लेकर कक्षाओं में पढ़ाने का निर्देश जारी कर दिया, ये आदेश कुलपति के अधिकार में नहीं आता है। साथ की कार्यवाहक कुलपति को किसी भी विभाग का डीन, विभागाध्यक्ष, निदेशक बदलने का भी अधिकार नहीं है।
मैने कभी कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा से बात नहीं की और न ही अपने पुत्र पुलकित के प्रवेश के लिए उनसे मिला। रुपये देने के ऑफर की बात पूरी तरह से तथ्यहीन और गलत है। यह हम लोगों को बदनाम करने की साजिश है।
डा. विनोद आर्य, पूर्व राज्यमंत्री एवं भाजपा नेता।
कार्यवाहक कुलपति के आदेश पर बिना प्रक्रिया कराया प्रवेश
ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में कार्यवाहक कुलपति के आदेेश के बाद निदेशक ने बिना किसी प्रकिया और मामले को बिना जाने ही पुलकित और दीदार सिंह का प्रवेश कर लिया, जबकि ये दोनों छात्र अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत 14 जुलाई से निलंबित थे और फिर मुन्नाभाई प्रकरण में 22 अगस्त को निलंबित हुए थे। विश्वविद्यालय एक्ट में कुलपति कोई भी आदेश सीधे कालेजों को नहीं भेज सकते। कुलपति रजिस्ट्रार के माध्यम से ही कोई आदेश जारी करा सकते हैं।
ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में बीएएमएस कर रहे बैच-2013 और 2014 के 31 छात्रों को निलंबित करने के बाद दो दागी छात्रों को प्रवेश देने के मामले में सभी नियमों को ताक पर रख दिया गया । कार्यवाहक कुलपति प्रो. सौदान सिंह ने ऋषिकुल परिसर के निदेशक प्रो. एएन पांडेय के साथ डीन प्रो. केके शर्मा को भी हटाया। 11 वें नंबर के प्रो. सुनील जोशी को निदेशक बनाते हुए अगले दिन 29 मार्च को पुलकित के साथ दीदार सिंह का प्रवेश कर दिया, जबकि इनके प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय में कोई कमेटी तक नहीं बनायी और कुलसचिव को भी दरकिनार करते हुए कार्यवाहक कुलपति ने सीधे आदेश कर दिया।
इस आदेश को प्राप्त करते ही ऋषिकुल निदेशक प्रो. सुनील जोशी ने भी बिना मामले की जांच किए ही दो दागी छात्रों का प्रवेश कर लिया। तत्कालीन कुलसचिव डा. मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि 29 मार्च को कुलसचिव का पदभार उनके पास था, लेकिन उन्हें दरकिनार करते हुए कार्यवाहक कुलपति ने कई आदेश जारी करते हुए उन्हें लागू करा दिया।
विश्वविद्यालय की टीम के सामने हुआ था पेश
ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में एसआईटी और प्रोफेसर कमेटी की टीम के सामने 2013 बैच के 17 संदिग्ध छात्र सामने ही नहीं आए। शामिल न होने पर इनके डाक्यूमेंट की अन्य छात्रों से जांच कराई, तो वो मैच नहीं हुए थे। जिससे निदेशक ने इनके खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके बाद पुलकित आर्य विश्वविद्यालय परिसर में जांच कमेटी के सामने प्रस्तुत हुआ, जहां जांच में उसके प्रवेश के डाक्यूमेंट पर लगा फोटो और हस्ताक्षर भी मैच नहीं हो सके थे। जबकि पुलकित आर्य का दावा है कि वो किसी भी टीम के सामने प्रस्तुत ही नहीं हुआ था। वे निष्कासित होने के चलते कालेज परिसर में नहीं पहुंच सके थे।
2011, 2012, 2013 में मेरिट में रहा टॉप
पुलकित आर्य के रोजाना नए मामले सामने निकलकर आ रहे हैं। जिसमें यूएपीएमटी-2011 में टॉप किया, लेकिन शैक्षिक डाक्यूमेंट सही नहीं पाए जाने पर किसी भी कालेज में प्रवेश नहीं दिया जा सका। अगले साल वर्ष 2012 में फिर से मेरिट में टॉपर रहा और पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में प्रवेश ले लिया, लेकिन जांच में डाक्यूमेंट फर्जी पाए जाने पर वहां से प्रथम वर्ष में ही निकाल दिया गया। इसके बाद वर्ष 2013 में यूएपीएमटी में टॉप किया और ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में प्रवेश ले लिया।
सीबीआई से जांच कराने की मांग
ऋषिकुल परिसर बैच 2013 के मुन्नाभाई प्रकरण के बाद प्रवेश ले चुके छात्र पुलकित आर्य और दीदार सिंह ने प्रेसक्लब में पत्रकार वार्ता करते हुए अपना पक्ष रखा। पुलकित आर्य ने बताया कि एबीवीपी से जुड़े होने के चलते हुए पूर्व में कांग्रेस की सरकार होते हुए आयुर्वेदिक कालेजों की अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठायी। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का भी विरोध किया। कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन, तालाबंदी भी की। जिस पर 14 जुलाई-2016 को उनके साथ दीदार सिंह को निलंबित कर दिया गया। उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया, लेकिन उनका निलंबन वापस नहीं लिया।
इसी दौरान 17 अगस्त को विश्वविद्यालय के आदेश पर जांच शुरू हो गई। निलंबन होने के चलते हुए उन्हें जांच की कोई सूचना नहीं दी गई और उनके खिलाफ निदेशक ने मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मामले को लेकर वे सभी छात्र हाईकोर्ट गए और जहां 21 नवंबर-2016 को कोर्ट ने विश्वविद्यालय को जांच कराकर अग्रिम कार्रवाई के लिए आदेश दिए थे।
पुलकित का कहना है कि विश्वविद्यालय ने उनके प्रवेश के लिए कालेज को कहा, लेकिन सहायक कुलसचिव संजीव कुमार पांडेय ने 16 जनवरी को उनके स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाते हुए निष्कासन को जारी रखा। उन्होंने मांग उठायी कि नगर कोतवाली पुलिस उनके मामले में शीघ्र चार्जशीट दाखिल करें, ताकि मामले का तत्काल निस्तारण हो सके। उन्होंने पूरे प्रकरण में सीबीआई से जांच कराने की मांग उठायी।