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देश के सबसे बड़े रिसर्च सेंटर में 'बेकार' हैं दर्जनों वैज्ञानिक
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 21 Apr 2014 12:54 PM IST
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देहरादून स्थित आईसीएफआरई को रिसर्च के लिए हर साल केंद्र सरकार से 125 करोड़ रुपए मिलते हैं। लेकिन इसमें से शोध के लिए छह करोड़ रुपए भी नहीं दिए जाते।
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वेतन और अन्य सुविधाएं बेकार
बजट नहीं मिलने से 40 वैज्ञानिक खाली हाथ बैठे हैं। शोध नहीं कर पाने की वजह से जहां वैज्ञानिकों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, वहीं वैज्ञानिकों को दिया जा रहा वेतन और अन्य सुविधाएं बेकार जा रही हैं।
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आईसीएफआरई की इस कार्यप्रणाली से देश के सबसे बड़े शोध संस्थान का कार्य और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रहा है। इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन (आईसीएफआरई) से जुड़े कुल चार केंद्र और नौ शोध संस्थान देशभर में कार्यरत हैं।
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बजट जारी नहीं होने से वैज्ञानिकों में निराशा
इन संस्थानों में पिछले तीन वर्षों में भर्ती किए गए 40 वैज्ञानिक हर साल बड़ी उम्मीद से रिसर्च प्रोजेक्ट पेश करते हैं, जिन्हें रिसर्च पॉलिसी कमेटी (आरपीसी) की मीटिंग में पास भी कर दिया जाता है।
लेकिन आईसीएफआरई से बजट जारी नहीं होने से वैज्ञानिकों को निराशा हाथ लगती है। बता दें कि वर्ष 2011 में आईसीएफआरई से जुड़े संस्थानों में 18, वर्ष 2012 में 7 और वर्ष 2013 में 15 नए वैज्ञानिकों की भर्ती की गई है जो आज बिना शोध के खाली हाथ हैं।
ऐसा है शोध प्रोजेक्टों पर फंडिंग का हाल
- वर्ष 2011 में 12वीं आरपीसी मीटिंग में आए सभी प्रोजेक्ट में से करीब 50 प्रतिशत को फंडिंग की गई, बाकी ऐसे ही रह गए।
- वर्ष 2012 में 13वीं आरपीसी मीटिंग में सभी संस्थानों से थ्रस्ट एरिया 1, 2 क्लाइमेट चेंज और फॉरेस्ट टाइप रिसर्च के आए कुल 308 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पास किए गए। इनमें से केवल 20 प्रतिशत बजट ही रिलीज किया गया।
- वर्ष 2013 में 14वीं आरपीसी मीटिंग में एफआरआई देहरादून, सीएसएफईआर इलाहाबाद, आईडब्ल्यूएसटी बैंगलोर, आईएफजीटीबी कोयंबटूर, आईएफपी रांची, टीएफआरआई जबलपुर, एएफआरआई जोधपुर, आरएफआरआई जोराहाट, सीएफएलई अगरतला, एचएफआरआई शिमला और आईएफबी हैदराबाद के वैज्ञानिकों के कुल 631.23 लाख रुपये के प्रोजेक्ट पास हुए, जिनमें से महज 10 प्रतिशत का ही बजट जारी किया गया।
- वर्ष 2014 में 15वीं आरपीसी मीटिंग में अभी तक प्रोजेक्ट तो पास हो गए हैं, लेकिन बजट का अभी तक कुछ पता नहीं है। वैज्ञानिकों में इन प्रोजेक्ट को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।
इस तरह के होते हैं शोध
इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन से जुड़े संस्थानों में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, फॉरेस्ट्री, इकोलॉजी, वन भूमि सुधार, संवर्धन और वन उत्पादकता आदि विषयों पर शोध किया जाता है।
इसी शोध के आधार पर इन विषयों से संबंधित नीतियां तैयार की जाती हैं।
शोध के लिए कुछ प्रोजेक्ट ऐसे रह जाते हैं, जिन्हें फंडिंग नहीं हो पाती है। लेकिन इससे यह न माना जाए कि आईसीएफआरई बजट नहीं देता है।
- डॉ. जीएस गौरेया, डीडीजी रिसर्च
मैं शोध प्रोजेक्ट को बजट नहीं मिलने से संबंधित ऐसे किसी भी सवाल का जवाब नहीं देना चाहता हूं।
- डॉ. विमल कोठियाल, एडीजी रिसर्च प्रोजेक्ट, आईसीएफआरई