{"_id":"66a9dd916a039326600652ae","slug":"migration-commission-report-11-revenue-villages-adjacent-to-the-china-border-are-uninhabited-uttarakhand-news-2024-07-31","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Uttarakhand: चीन सीमा से सटे 11 राजस्व गांव गैर आबाद, पलायन आयोग की रिपोर्ट...सरकार को दिए 45 सुझाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarakhand: चीन सीमा से सटे 11 राजस्व गांव गैर आबाद, पलायन आयोग की रिपोर्ट...सरकार को दिए 45 सुझाव
Wed, 31 Jul 2024 12:30 PM IST
रेनू सकलानी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादूनचीन सीमा से सटे 11 राजस्व गांव गैर आबाद -उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ जिले के चार सीमांत ब्लाकों में पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा -आयोग ने रिवर्स पलायन के लिए प्रदेश सरकार को दिए 45 सुझाव -सीमावर्ती गांव में मनरेगा के तहत दिया जाए 200 दिन का रोजगार अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। भारत-चीन सीमा से सटे चमोली, उत्तरकाशी व पिथौरागढ़ जिले के 11 राजस्व गांव गैर आबाद हैं। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। आयोग ने रिवर्स पलायन को बढ़ावा देकर इन गांवों को आबाद करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। वहीं, वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत प्रदेश सरकार सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं, पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। हाल ही में पलायन आयोग ने चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी, चमोली जिले के जोशीमठ, पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी, धारचूला विकास खंड की 131 गांवों का सर्वे किया। जिसमें पाया गया कि वर्तमान में उत्तरकाशी के नेलांग व जादुंग राजस्व में गैर आबाद हैं। इसके अलावा चमोली जिले में गुमकाना, लुम, खिमलिंग, सांगरी ढकधोना गांव, पिथौरागढ़ में सुम्तू व पोटिंग गैर आबाद हैं। आयोग ने सीमावर्ती गांवों से पलायन पर चिंता जताते हुए प्रदेश सरकार को रिवर्स पलायन के लिए 45 सुझाव दिए। आयोग का कहना है कि सीमावर्ती गांवों में रोजगार के लिए मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए। इसके अलावा वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत आसपास के गांवों को क्लस्टर के रूप में विकसित करने की जरूरत है। सीमांत क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को आवास के लिए विशेष प्रावधान किया जाए। नेलांग व जादुंग के ग्रामीणों में अपने गांव जाने के लिए परमिट लेना पड़ता है। इसे व्यावहारिक किया जाए। साथ ही सीमावर्ती गांवों में सेब व अन्य बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। जिससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ सके। .......... सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी धारचूला, जोशीमठ, भटवाड़ी व मुनस्यारी ब्लॉक में कुल 20 स्वास्थ्य केंद्र है। इन केंद्रों में 11 डॉक्टरों तैनात है। स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण भी लोग पलायन करने को मजबूर हैं। ....... कोट आयोग ने चीन सीमा से सटे गांवों के पलायन पर सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी है। इन गांवों में सामाजिक व आर्थिक विकास के साथ रिवर्स पलायन के लिए आयोग ने सुझाव भी दिए हैं। सीमावर्ती गांवों में पर्यटन के साथ बागवानी लोगों की आर्थिक का बड़ा जरिया बन सकता है। -डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादूनचीन सीमा से सटे 11 राजस्व गांव गैर आबाद -उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ जिले के चार सीमांत ब्लाकों में पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा -आयोग ने रिवर्स पलायन के लिए प्रदेश सरकार को दिए 45 सुझाव -सीमावर्ती गांव में मनरेगा के तहत दिया जाए 200 दिन का रोजगार अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। भारत-चीन सीमा से सटे चमोली, उत्तरकाशी व पिथौरागढ़ जिले के 11 राजस्व गांव गैर आबाद हैं। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। आयोग ने रिवर्स पलायन को बढ़ावा देकर इन गांवों को आबाद करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। वहीं, वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत प्रदेश सरकार सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं, पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। हाल ही में पलायन आयोग ने चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी, चमोली जिले के जोशीमठ, पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी, धारचूला विकास खंड की 131 गांवों का सर्वे किया। जिसमें पाया गया कि वर्तमान में उत्तरकाशी के नेलांग व जादुंग राजस्व में गैर आबाद हैं। इसके अलावा चमोली जिले में गुमकाना, लुम, खिमलिंग, सांगरी ढकधोना गांव, पिथौरागढ़ में सुम्तू व पोटिंग गैर आबाद हैं। आयोग ने सीमावर्ती गांवों से पलायन पर चिंता जताते हुए प्रदेश सरकार को रिवर्स पलायन के लिए 45 सुझाव दिए। आयोग का कहना है कि सीमावर्ती गांवों में रोजगार के लिए मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए। इसके अलावा वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत आसपास के गांवों को क्लस्टर के रूप में विकसित करने की जरूरत है। सीमांत क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को आवास के लिए विशेष प्रावधान किया जाए। नेलांग व जादुंग के ग्रामीणों में अपने गांव जाने के लिए परमिट लेना पड़ता है। इसे व्यावहारिक किया जाए। साथ ही सीमावर्ती गांवों में सेब व अन्य बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। जिससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ सके। .......... सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी धारचूला, जोशीमठ, भटवाड़ी व मुनस्यारी ब्लॉक में कुल 20 स्वास्थ्य केंद्र है। इन केंद्रों में 11 डॉक्टरों तैनात है। स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण भी लोग पलायन करने को मजबूर हैं। ....... कोट आयोग ने चीन सीमा से सटे गांवों के पलायन पर सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी है। इन गांवों में सामाजिक व आर्थिक विकास के साथ रिवर्स पलायन के लिए आयोग ने सुझाव भी दिए हैं। सीमावर्ती गांवों में पर्यटन के साथ बागवानी लोगों की आर्थिक का बड़ा जरिया बन सकता है। -डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग
Published by: रेनू सकलानी
Updated Wed, 31 Jul 2024 12:30 PM IST
सार
पलायन आयोग ने रिवर्स पलायन के लिए प्रदेश सरकार को 45 सुझाव दिए हैं। सीमावर्ती गांव में मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार दिया जाने की बात कही गई है।
विज्ञापन
मीटिंग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
भारत-चीन सीमा से सटे चमोली, उत्तरकाशी व पिथौरागढ़ जिले के 11 राजस्व गांव गैर आबाद हैं। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। आयोग ने रिवर्स पलायन को बढ़ावा देकर इन गांवों को आबाद करने के लिए कई सुझाव दिए हैं। वहीं, वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत प्रदेश सरकार सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाएं, पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।
विज्ञापन
हाल ही में पलायन आयोग ने चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी, चमोली जिले के जोशीमठ, पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी, धारचूला विकास खंड की 131 गांवों का सर्वे किया। जिसमें पाया गया कि वर्तमान में उत्तरकाशी के नेलांग व जादुंग राजस्व में गैर आबाद हैं। इसके अलावा चमोली जिले में गुमकाना, लुम, खिमलिंग, सांगरी ढकधोना गांव, पिथौरागढ़ में सुम्तू व पोटिंग गैर आबाद हैं।
विज्ञापन
गांवों को क्लस्टर के रूप में विकसित करने की जरूरत
आयोग ने सीमावर्ती गांवों से पलायन पर चिंता जताते हुए प्रदेश सरकार को रिवर्स पलायन के लिए 45 सुझाव दिए। आयोग का कहना है कि सीमावर्ती गांवों में रोजगार के लिए मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार दिया जाना चाहिए। इसके अलावा वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत आसपास के गांवों को क्लस्टर के रूप में विकसित करने की जरूरत है।
विज्ञापन
सीमांत क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को आवास के लिए विशेष प्रावधान किया जाए। नेलांग व जादुंग के ग्रामीणों में अपने गांव जाने के लिए परमिट लेना पड़ता है। इसे व्यावहारिक किया जाए। साथ ही सीमावर्ती गांवों में सेब व अन्य बागवानी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। जिससे स्थानीय लोगों की आमदनी बढ़ सके।
सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
धारचूला, जोशीमठ, भटवाड़ी व मुनस्यारी ब्लॉक में कुल 20 स्वास्थ्य केंद्र है। इन केंद्रों में 11 डॉक्टरों तैनात है। स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण भी लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand Congress: केदारनाथ यात्रा के बहाने दिग्गजों के बीच दूरियां बनीं नजदीकियां, सामने आई ये तस्वीर
आयोग ने चीन सीमा से सटे गांवों के पलायन पर सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी है। इन गांवों में सामाजिक व आर्थिक विकास के साथ रिवर्स पलायन के लिए आयोग ने सुझाव भी दिए हैं। सीमावर्ती गांवों में पर्यटन के साथ बागवानी लोगों की आर्थिक का बड़ा जरिया बन सकता है। -डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग
धारचूला, जोशीमठ, भटवाड़ी व मुनस्यारी ब्लॉक में कुल 20 स्वास्थ्य केंद्र है। इन केंद्रों में 11 डॉक्टरों तैनात है। स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के कारण भी लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand Congress: केदारनाथ यात्रा के बहाने दिग्गजों के बीच दूरियां बनीं नजदीकियां, सामने आई ये तस्वीर
आयोग ने चीन सीमा से सटे गांवों के पलायन पर सर्वे रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी है। इन गांवों में सामाजिक व आर्थिक विकास के साथ रिवर्स पलायन के लिए आयोग ने सुझाव भी दिए हैं। सीमावर्ती गांवों में पर्यटन के साथ बागवानी लोगों की आर्थिक का बड़ा जरिया बन सकता है। -डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, पलायन आयोग