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देहरादून: आज रहेगी केमिस्ट की हड़ताल, इस समय से बंद रहेंगे सभी मेडिकल स्टोर

Fri, 28 Sep 2018 05:00 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 28 Sep 2018 05:00 AM IST
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Medical stores will close after strike in dehradun 
मेडिकल स्टोर

राजधानी में शुक्रवार को केमिस्ट हड़ताल पर रहेंगे। ऑल इंडिया केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल को डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एसोसिएशन ने भी सफल बनाने को पूरी ताकत झोंक दी है। दोपहर 12 बजे के बाद से सभी मेडिकल स्टोर बंद करने की अपील की गई है। साथ ही एसोसिएशन ने जरूरी दवाईयां पहले ही खरीदकर रखने की अपील भी की।

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ई-फार्मेसी को मान्यता देने वाले कानून के खिलाफ  केमिस्ट हड़ताल कर रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से हड़ताल की तैयारियों को लेकर बृहस्पतिवार को बैठक की गई। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप मल्होत्रा, महामंत्री नवीन खुराना ने बताया कि केंद्र सरकार ने 28 अगस्त 2018 को अधिसूचना जारी की है। इसमें ऑनलाइन दवा बिक्री को नियमित करने की बात कही गई है।
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ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री बंद करने की मांग की है। कहा कि इससे न केवल दवा कारोबारियों का नुकसान है बल्कि ऑनलाइन दवा बिक्री में नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शुक्रवार को देहरादून के सभी केमिस्ट दून अस्पताल के पास जैन मेडिकल हॉल में एकत्र होंगे। यहां से डीएम कार्यालय कूच करेंगे। इसके बाद सभी केमिस्ट प्रधानमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन देंगे। बैठक में नवनीत मल्होत्रा, टीएस अग्रवाल, अनिल घई, विपुल मित्तल, जेएस बिष्ट, उमाकांत अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

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यह है केमिस्ट को शिकायत

-ऑनलाइन पोर्टल बिना किसी जवाबदेही के दवा के पर्चे की प्रमाणिकता को जांचे बिना ही दवा दे रहे हैं।

-एमटीपी किट, सिडनेफि ल कोडीन जैसी दवाओं को पंजीकृत मेडिकल प्रेक्टिशनर के पर्चे के बिना बेचा जा रहा है।

-मनोचिकित्सक, त्वचा रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञों के पर्चे पर लिखी जाने वाली दवाओं को गैर योग्यता प्राप्त डॉक्टर के पर्चे पर खरीदा जाता है।

-दवाओं की ब्रिकी पुराने पर्चे या फि र बनावटी पर्चे पर की जाती है।

हमारा मकसद किसी को परेशान करना नहीं
केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि उनका मकसद किसी को परेशान करना नहीं है लेकिन सरकार उनकी एक नहीं सुन रही है। कई बार वह सरकार को चेता चुके हैं लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। 

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