भाजपा नेता मीटू प्रकरण: पीड़िता ने उठाए विवेचना पर सवाल, कहा- जांच में पुलिस ने आरोपी का किया बचाव
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उत्तराखंड के बहुचर्चित मीटू प्रकरण में पीड़िता ने पुलिस विवेचना पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि आरोपी का सत्ता से जुड़े होने के कारण पुलिस पहले दिन से आरोपी बीजेपी नेता के बचाव में जुटी है। पुलिस महानिदेशक को लिखित शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
मीटू प्रकरण में पुलिस ने भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री संजय कुमार के खिलाफ 15 मई को यौन उत्पीड़न की धारा में चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस के अनुसार घटना की जो तारीख बताई गई है उस दिन संजय कुमार देहरादून से बाहर प्रदेश के एक मंत्री की बेटी की शादी में शामिल थे।
इसके अलावा एफएसएल रिपोर्ट में संजय कुमार के मोबाइल से डाटा उड़ाने की पुष्टि भी नहीं हुई थी। पुलिस ने उसी आधार पर विवेचना में दुष्कर्म की धारा हटा दी थी। पीड़िता उस दिन से ही पुलिस की विवेचना पर सवाल उठा रही है।
पुलिस महानिदेशक को भेजी लिखित शिकायत में पीड़िता ने आरोप लगाया है कि विवेचना करने वाले अधिकारी ने आईपीसी की धारा 376 यह कहते हुए हटा दी कि घटना के दिन आरोपी संजय कुमार देहरादून में ही उपस्थित नहीं थे।
विवेचक ने संजय कुमार के मोबाइल को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा था, उसकी रिपोर्ट को भी 376 हटाने का आधार बताया गया है। जबकि वह कई बार विवेचक को बोल चुकी थी कि घटना अप्रैल के अंतिम या मई 2018 के पहले सप्ताह की है। उन्होंने मांग की कि मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यह था मामला
भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता ने दो नवंबर को प्रदेश महामंत्री (संगठन) संजय कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया था। कार्यकर्ता ने संजय कुमार पर अश्लील मेसेज भेजने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
यौन उत्पीड़न का यह मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद भाजपा ने संजय कुमार को संगठन मंत्री पद से हटा दिया था। 11 नवंबर 2018 को पीड़ित की तरफ से तहरीर आने के बाद एसपी देहात सरिता डोभाल को जांच सौंपी गई थी। जनवरी में जांच के बाद पीड़ित की तरफ से शहर कोतवाली में यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
इसी बीच संजय कुमार ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे लिया था। विवेचना के दौरान पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में संजय कुमार पर दुष्कर्म का आरोप भी लगाया था। पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत दर्ज कराए, बयान में पुलिस को दिए बयानों की पुष्टि की थी। इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमे में धारा 376 (दुष्कर्म) को बढ़ा दिया था।