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Mussoorie: पहले नदी में पाउडर डालकर मछलियों को किया बेहोश, फिर 20 हजार से ज्याद लोग मछली पकड़ने कूदे, जानिए क्यों किया ऐसा

Mon, 27 Jun 2022 04:08 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 27 Jun 2022 04:08 AM IST
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Maun Mela Mussoorie More than 20 thousand people jumped in river fishing
नदी में मछली पकड़ते लोग - फोटो : अमर उजाला
दो साल बाद आयोजित जौनपुर का ऐतिहासिक राज मौण मेला रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान अगलाड नदी में टिमरू पाउडर डालकर मछलियों को बेहोश किया गया फिर हजारों लोग नदी में कूद पड़े और मछलियां पकड़ी। इस मौके पर ढोल नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों ने लोकनृत्य किया।
Maun Mela Mussoorie More than 20 thousand people jumped in river fishing
नदी में टिमरू पाउडर डालते हुए - फोटो : अमर उजाला

मेले में जौनपुर, जौनसार, रंवाई घाटी समेत आसपास के क्षेत्र के 20 हजार से अधिक लोगों ने शिरकत की। लोग सुबह से ही नदी के पास पहुंचने शुरू हो गए थे। नदी में पहुंचने पर ढोल नगाड़ों के साथ ग्रामीणों ने लोक गीतों संग पारंपरिक लोक नृत्य किया। इस दौरान नदी में एक साथ आठ क्विंटल से अधिक टिमरू पाउडर डाला फिर जाल लेकर नदी में मछली पकड़ने के लिए कूद पड़े। प्रदीप कवि ने बताया कि अबकी नैनबाग क्षेत्र के करीब 16 गांवों के लोगों ने करीब दो से तीन सप्ताह में टिमरू पाउडर को बनाया। मेला कोरोना काल 2020 और 2021 में आयोजित नहीं हुआ था। कहा कि दो साल बाद आयोजित हुए मेले को लेकर ग्रामीणों में उत्साह और खुशी है।

Maun Mela Mussoorie More than 20 thousand people jumped in river fishing
maun mela - फोटो : फाइल फोटो
मौण मेला समिति अध्यक्ष महिपाल सिंह सजवाण ने बताया कि क्षेत्र के लोग प्राचीन काल से मेले को मनाते आ रहे हैं। कहा कि 156 साल से परंपरा लगातार चल रही है। सिया चौहान ने बताया कि मेला क्षेत्र का पारंपरिक मेला है। कुछ लोग नदी में ब्लीचिंग पाउडर डालकर मछली का अवैध पातन कर रहे हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए। कहा कि आने वाले समय में जागरुकता अभियान चलाएंगे कि लोग नदी में ब्लीचिंग पाउडर न डाले। मौण मेला 1866 में तत्कालीन टिहरी नरेश ने शुरू कराया था। उस समय से लगातार मेला आयोजित किया जाता है।
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Maun Mela Mussoorie More than 20 thousand people jumped in river fishing
maun mela
पाउडर बनाने के लिए एक माह से शुरू होती तैयारी
जिस टिमरू पाउडर को ग्रामीण मछली पकड़ने के लिए नदी में डालते हैं, उसको बनाने के लिए गांव के लोग एक माह पूर्व से तैयारी में जुट जाते है। प्राकृतिक जड़ी बूटी और औषधीय गुणों से भरपूर टिमरू के पौधे की तने की छाल को ग्रामीण निकालकर सुखाते हैं फिर छाल को ओखली या घराट में बारीक पीसकर पाउडर तैयार करते हैं। टिमरू पाउडर के नदी में पड़ने के बाद कुछ देर के लिए मछलियां बेहोश हो जाती हैं। पाउडर से मछलियां मरती नही हैं।
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