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कारोबारी मनोज गुप्ता अपहरण कांड का मास्टरमाइंड गया जेल
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 30 Jan 2017 07:31 PM IST
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मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता के अपहरण कांड का मास्टर माइंड विनय त्यागी उर्फ टिंकू सोमवार को जेल चला गया है। एक साल पहले प्रेमनगर स्थित फार्म हाउस से हुए अपहरण के मामले में विनय पर दस हजार रुपये का इनाम घोषित था।
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देहरादून पुलिस ने रविवार रात मेरठ के मेडिकल क्षेत्र में दबिश देकर उसे दबोच था। कई दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे विनय त्यागी ने यह कहकर चौंका दिया कि कारोबारी मनोज गुप्ता से लेनदेन का मामला था, जिसे अपहरण का नाम दिया गया है।
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मेरठ के कारोबारी मनोज गुप्ता का अपनी महिला मित्र ममता मसीह के साथ 18 फरवरी 2016 की रात देहरादून के प्रेम नगर स्थित डूंगा फार्म हाउस पर आया था, जहां से ममता मसीह के इशारे पर शातिर विनय त्यागी द्वारा भेजे गए बदमाशों ने गुप्ता का अपहरण कर लिया था। कारोबारी की रिहाई के बदले एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी।
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21 फरवरी को पुलिस ने मनोज गुप्ता को रिहा कराने के साथ दावा किया था कि अपहरण कांड का मास्टर माइंड विनय त्यागी उर्फ टिंकू है। पुलिस ममता मसीह समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वांछित विनय त्यागी उर्फ टिंकू पर दस हजार रुपये और मोनू त्यागी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस तब से उसकी फिराक में थी।
पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह ने बताया कि पुलिस कई दिन से उसकी टोह में थी। रविवार रात मेरठ के गढ़ रोड से प्रेमनगर पुलिस ने विनय त्यागी को गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर पूछताछ की गई तो आरोपी ने अपहरण की बात स्वीकार की। मेरठ का जागृति विहार निवासी विनय त्यागी शातिर अपराधी रहा है।
1995 में मेरठ के एक हत्याकांड में विनय पर एक लाख रुपये का इनाम रहा है। 2011 में अपराध से तौबा कर आरोपी ने राजनैतिक चोला पहनने का प्रयास किया था। देवबंद से वह 2007 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। उसकी पत्नी मुजफ्फरनगर के पुरकाजी ब्लाक से प्रमुख है। आरोपी यूपी के एक प्रमुख राजनैतिक दल से एक सीट पर दावेदारी भी कर रहा था।
उसके खिलाफ उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दो दर्जन से अधिक मामले दर्ज है। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि विनय त्यागी उर्फ टिंकू ने 16 साल की उम्र में पहला अपराध किया था। अपने सहपाठी पर जान लेवा हमला किया था। उसके बाद विनय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसके पिता एक सरकारी संस्थान में अधिकारी रहे हैं। दोपहर बाद आरोपी विनय त्यागी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस से हुई विनय की गुत्थम-गुत्था
प्रेमनगर पुलिस वांछित विनय त्यागी की तलाश में 14 दिन से दौड़ रही थी। मुंबई, राजस्थान, हरियाणा तक उसका पीछा हुआ। रविवार को दिन भर उसकी तलाश में लगी रही। मेरठ के गढ़ रोड स्थित एक रेस्टोरेंट के पास दारोगा मानवेन्द्र शाह, कांस्टेबल चमन सिंह और सुनील मलिक ने घेर लिया। विनय त्यागी ने पुलिस गिरफ्त से बचने का प्रयास किया। आरोप है कि पुलिस कर्मियों और विनय के बीच जमकर गुत्थम गुत्था हुई, लेकिन पुलिस उस पर भारी पड़ी। इसी बीच मेडिकल थाने पर अपहरण की सूचना भी दी गई, लेकिन मेरठ पुलिस पहले से ही दून पुलिस की घेराबंदी से वाकिफ थी।
नौ आरोपी जेल, दसवां मोनू त्यागी फरार
मनोज गुप्ता अपहरण कांड में सफेदपोश विनय त्यागी समेत दस लोगों की संलिप्तता उजागर हुई थी। आठ आरोपी ममता मसीह, अबुंज त्यागी, विकास कुमार, मनोज जाटव, केशव शर्मा उर्फ राहुल, भूदेव उर्फ भूरा और जगदीश उर्फ पिंटू पहले ही जेल जा चुके हैं, जबकि विनय त्यागी की गिरफ्तारी के साथ संख्या नौ पहुंच गई है। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि दसवां आरोपी मोनू त्यागी अभी फरार है, जिसकी तलाश में दबिश चल रही है।
अपहरण नहीं लेन-देन का मामला
मनोज गुप्ता अपहरण कांड के आरोपी विनय त्यागी ने बड़े बेबाकी से मीडिया से बात की। अपहरण कांड का मास्टर माइंड बताए जाने पर यह कहकर टोका कि यह उन पर आरोप है। यह आरोप कितना सही है और कितना गलत, इसका फैसला अदालत करेगी। उन्होंने कहा कि मनोज गुप्ता के अपहरण की कहानी सही नहीं है। लेन-देन का मामला था, जिस अपहरण बनाया गया है। 2011 के बाद से वह सक्रिय राजनीति में उतर गया था। आरोपी विनय त्यागी उर्फ टिंकू ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी के लिए दून पुलिस को दाद देनी होगी। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पुलिस उन्हें पकड़ लेगी। यदि उन्हें इस बात का अहसास होता तो अब तक यह मामला सुलझ जाता।
पुलिस टीम को पुरस्कार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वीटी अग्रवाल ने पुलिस टीम में शामिल एसओ नरेश सिंह राठौड, उप निरीक्षक मानवेन्द्र सिंह गुंसाई, कोमल सिंह रावत, कांस्टेबल चमन कुमार, सुनील मलिक, प्रविन्द्र और इंदर सिंह को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
करा लिया था सीबीआईडी जांच का आदेश
अपहरण के मास्टर माइंड बताए गए विनय त्यागी ने अपने राजनैतिक आकाओं की मदद से मनोज गुप्ता अपहरण कांड की जांच सीबीसीआईडी से कराने के आदेश करा लिए थे। उस समय विनय त्यागी ने कहा था कि उन्हें झूठा फंसाया गया। पुलिस की विपरीत रिपोर्ट के बावजूद सीबीसीआईडी जांच का आदेश हो गया। तत्कालीन एसएसपी सदानंद दाते इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत तक गए थे। कई दिन की माथापच्ची के बाद यह आदेश वापस हुआ था। इस कारण विनय त्यागी को पूरा खेल बिगड गया था।