इस मामा-भांजे ने किया पुलिस की नाक में दम, पढ़िए इनके 'काले' कारनामे
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बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों को ठगने वाला यह गिरोह मामा भांजे का बनाया गिरोह है। ये दोनों ही भोले भाले लोगों का खाता खुलवाते थे।
इन्हीं खातों में शिकार बनाए जाने वाले लोगों से पैसे जमा कराए जाते थे। जबकि, इनका एक साथी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनी में क्लर्क है जो देशभर के लोगों का डाटा (फोन नंबर आदि) चुराता था। इसके साथ ही तीन लोग नोएडा में एक कॉल सेंटर (फर्जी) में बैठकर देशभर के लोगों को फोन कर उन्हें झांसे में लेते थे।
पुलिस के अनुसार जांच में आया है कि सुधीर गुप्ता एक अन्य अभियुक्त अक्षय गुप्ता का मामा है। दोनों ही शातिर किस्म के हैं। वे सज्जन व निर्धन लोगों को अपने झांसे में लेकर उनका विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाते थे।
सभी आरोपी कभी न कभी कॉल सेंटर में काम कर चुके थे
इसके बाद बैंक से मिलने वाले डेबिट कार्ड, चैक बुक और पासबुक अपने पास रख लेते थे। इन्हीं खातों का विवरण लोगों को उपलब्ध कराने के बाद इनमें पैसा जमा कराते थे। इसके बाद दीपक कुमार, आनंद पांडेय और धर्मेंद्र इन चेक बुक, डेबिट कार्ड आदि माध्यम से खातों से निकालते थे।
ये तीनों कुल रकम का 20 फीसदी हिस्सा दीपक सिंह और मोहित को देते थे। इन दोनों का काम था कि वे नोएडा में बैठकर अलग अलग नंबरों से लोगों को बीमा पॉलिसी में अधिक लाभ का प्रलोभन देते थे। दीपक सिंह का एक काम और था कि वह देशभर के लोगों का डाटा चुराता था।
वह देश की एक बड़ी बीमा कंपनी में क्लर्क है। उसे यह डाटा आसानी से मिल जाता था। इन सभी के बारे में एक बात सामान्य है कि सभी कभी न कभी कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। इसी के कारण वे ऐसी बातें करने में सक्षम थे जिससे कि लोगों को झांसे में लिया जा सके।