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महेंद्र भाटी हत्याकांड: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद डीपी यादव की शॉर्ट टर्म बेल की अवधि बढ़ाई 

Mon, 21 Jun 2021 08:55 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 21 Jun 2021 08:55 PM IST
सार

बता दें कि कोर्ट ने डीपी यादव को 20 अप्रैल को दो महीने की अंतरिम जमानत दी थी जिसकी अवधि 20 जून को समाप्त हो गई थी।

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Mahendra Bhati murder case: Uttarakhand High Court extends short term bail of former MP DP Yadav
कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने यूपी के बाहुबली नेता एवं पूर्व सांसद डीपी यादव सहित तीन अन्य के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या करने के मामले में सुनवाई के बाद डीपी यादव को मेडिकल चेकअप करने के लिए पूर्व में दी गई शॉर्ट टर्म बेल की अवधि दो माह के लिए और बढ़ा दी है। पूर्व में कोर्ट ने उन्हें 20 अप्रैल को दो माह की अंतरिम जमानत दी थी जिसकी अवधि 20 जून को समाप्त हो गई थी।

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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 13 सितंबर 1992 को गाजियाबाद के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या हो गई थी, जिसमें डीपी यादव, परनीत भाटी, करन यादव व पाल सिंह उर्फ लक्कड़ पाला आरोपी थे।
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इस मामले में 15 फरवरी 2015 को देहरादून की सीबीआई कोर्ट ने चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सीबीआई कोर्ट के इस आदेश को चारों अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपीलार्थी डीपी यादव की ओर से शॉर्ट टर्म बेल की अवधि बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था, जिस पर कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत की अवधि को दो माह के लिए और बढ़ा दिया है।
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बता दें कि गाजियाबाद के ब्लॉक प्रमुख रहे महेंद्र सिंह भाटी के सहयोग से डीपी यादव ने 1970 में शराब का कारोबार शुरू किया था। यादव के खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1979 में गाजियाबाद के कविनगर थाने में दर्ज किया गया।

उसके बाद डीपी यादव की क्राइम कुंडली लंबी होती चली गई। हत्या के प्रयास के तीन, डकैती के दो, अपहरण और फिरौती के कई मामलों समेत, उत्पादन शुल्क एक्ट के तहत भी मामले दर्ज हुए। यही नहीं, उस पर गैंगस्टर, आतंकी और विघटनकारी गतिविधियों के मामले में भी केस दर्ज हुए।


उसके खिलाफ गाजियाबाद, मोदीनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, बदायूं समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। इसके साथ ही हरियाणा के जींद और सिरसा में भी उसका खौफ बढ़ा। 

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