फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   mahashivratri 2018 this man create record

35 साल से हर शिवरात्रि पर कर रहे ऐसा कि अब बना दिया रिकॉर्ड

Tue, 13 Feb 2018 03:16 PM IST
गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल
गिरीश रंजन तिवारी, अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 13 Feb 2018 03:16 PM IST
विज्ञापन
mahashivratri 2018 this man create record
काठमांडू पशुपतिनाथ - फोटो : ANI

पर्यटन उनकी रग-रग में बसा है, यही उनका शौक, यही जुनून और यही व्यवसाय भी है। इसी जुनून के चलते नैनीताल के इस पर्यटन व्यवसायी ने 35 वर्ष पूर्व स्वयं से एक कठिन वादा किया।

विज्ञापन


अब 35 वर्ष बाद उसी वादे को निभाने वह शिवरात्रि के अवसर पर काठमांडू पशुपतिनाथ के दरबार में पहुंच गए हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि उनका यह काम गिनीज बुक के रिकॉर्ड में दर्ज होने लायक हो। रिकॉर्ड इसलिए कि वह वहां शिवरात्रि पर 35वीं बार गए हैं, वह भी हर साल लगातार। इस अनोखे जुनून ने खाती के खाते में एक खास ख्याति जोड़ दी है।
विज्ञापन


नैनीताल में पर्यटन यात्राओं के पर्याय बन चुके वाईटीडीओ के संस्थापक विजय मोहन सिंह खाती नैनीताल से भारत के कोने-कोने के लिए प्रतिवर्ष धार्मिक आदि स्थलों की यात्राएं आयोजित करते हैं। यूरोप, दुबई, थाईलैंड, मॉरीशस सहित तमाम देशों के टूर भी आयोजित करते हैं। खाती के टूरों को लोगों ने बहुत पसंद किया और आज उनका टूर प्रोग्राम जारी होते ही बुकिंग फुल हो जाती है लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि खाती स्वयं भी पर्यटन को इतने समर्पित हैं कि 35 वर्षों से निर्बाध रूप से हर शिवरात्रि पर नेपाल जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अंतर है तो इतना कि पहले दो दशक तक वह अकेले या अपने एक दो साथियों के साथ वहां जाते थे। अब श्रद्धालुओं का टूर लेकर जाते हैं। खाती बताते हैं कि वे सबसे पहले 1973 में शिवरात्रि पर नेपाल गए। इसके बाद 1983 में गए। इस बार उन्हें वहां कुछ ऐसी दैवी प्रेरणा हुई कि उन्होंने निश्चय किया कि जब तक शरीर साथ देगा वह यहां शिवरात्रि पर हर वर्ष आएंगे।

माओवाद के बाद भी जान हथेली पर रखकर पशुपतिनाथ

mahashivratri 2018 this man create record
कोई भी साथ चलने को भी राजी न हुआ
इसके बाद वह 17 वर्ष तक वहां जाते रहे लेकिन परीक्षा की घड़ी आई 2002 में जब माओवाद के दौर में नेपाल हिंसा की चपेट में आ गया और एक एक महीने तक के माओवादियों के नेपाल बंद जैसे विरोध प्रदर्शन आम हो गए। तब सभी लोगों ने उनसे जोखिम न लेने और नेपाल न जाने को कहा और कोई भी साथ चलने को भी राजी न हुआ, लेकिन दृढ़ इच्छा शक्ति से वह अकेले ही रवाना हो गए और दो सौ किमी से ज्यादा पैदल यात्रा कर जंगलों में भटक कर और कई बार दिन भर भूखे, प्यासे बिता कर भी यात्रा पूरी की।

अगले दो वर्ष वहां के हालात और भी बिगड़ गए लेकिन खाती जान हथेली पर रख कर हर वर्ष फिर भी वहां हर वर्ष जाते रहे। हालात सामान्य होने पर खाती 10 वर्षों तक अपनी पत्नी को भी साथ ले गए। खाती बताते हैं पहले वह बंगाल से कंचनपुर होकर जाते थे, फिर बिहार के रक्सौल विराटनगर होते हुए जाने लगे, उसके बाद गोरखपुर अयोध्या भैरवा होकर जाने लगे। अब महेंद्रनगर बुटवल पोखरा होकर जाते हैं। महेंद्रनगर से काठमांडू 800 किमी मार्ग भारत की मदद से बना है जो बहुत बढ़िया बनाया गया है।

खाती बताते हैं इन 35 वर्षों में वहां भी व्यापक परिवर्तन आया है। पहले वहां हिप्पी कल्चर था। नशे का बेहद ज्यादा चलन था। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार चरम पर था, अब इनमें बहुत बदलाव आया है। लोग रोजगार के प्रति जागरूक हुए हैं लेकिन समाज में गरीब, अमीर के बीच की खाई बहुत गहरी है। एक ओर भारी गरीबी है तो एक वर्ग हॉलीवुड स्टाइल में जीवन जी रहा है। खाती ने बताया कि वहां से श्रमिक, कुली के रूप में रोजगार की तलाश में भारत आने के बजाय लोग अब दुबई, खाड़ी देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
 

बगैर पैसों के घूम आए दस देश

mahashivratri 2018 this man create record
पर्यटन को लेकर बचपन से ही दीवानगी की हद तक जुनून

सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां, जिंदगानी गर रही तो ये जवानी फिर कहां। राहुल सांकृत्यायन ने जब ये प्रसिद्ध उक्ति कही थी तो शायद उन्हें भी भरोसा नहीं रहा होगा कि उनकी नसीहत पर कोई इस सीमा तक अमल करेगा, पर खाती ने ऐसा ही किया। खाती के दिल में पर्यटन को लेकर बचपन से ही दीवानगी की हद तक जुनून था।

संयोग से उन्हें अपने जैसा शौक रखने वाले राजा साह, राजीव पांडे, योगेश साह का साथ मिल गया। 1976 में डिग्री कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह बगैर जेब में पैसे के विश्व भ्रमण पर निकल पड़े। उन्होंने मुख्यत: सड़क मार्ग से महीनों की यात्रा कर अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की, जॉर्डन, सीरिया, मिश्र, ग्रीस, इटली, यूगोस्लाविया, बुल्गारिया का भ्रमण किया। खाती बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने ईरान में निर्माण कार्य में श्रमिक, सीरिया की फैक्ट्री में, जॉर्डन में होटल में काम कर खर्चा जुटाया।

इनके परिवारजनों की तो इनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद भी टूटने लगी थी। बाद में खाती ने इन साथियों के साथ नेपाल सहित उत्तराखंड के अनेक ग्लेशियर, बुग्यालों की भी यात्रा की। वह अमेरिका, चीन, यूरोप सहित विश्व के कई देशों का भ्रमण कर चुके हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी हर वर्ष किसी नए देश की यात्रा अवश्य करते हैं। अपने शौक को ही व्यवसाय भी बना चुके खाती ने युवाओं को पर्यटन के प्रति जागरूक करने को 1982 में नैनीताल में यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन की स्थापना भी की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed