महाकुंभ 2021: हरिद्वार पहुंचे सांसद साक्षी महाराज बोले- पश्चिम बंगाल से ममता सरकार का जाना तय
- अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने राज्य सरकार को भ्रमित कर रहे अधिकारियों को हटाने की मांग की
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रविवार को हरिद्वार पहुंचे भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी स्थित चरण पादुका मंदिर पहुंचकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से भेंट की। मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज ने शॉल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर साक्षी महाराज ने कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है। दोनों सरकारों के आपसी समन्वय से कुंभ मेला दिव्य और भव्य रूप में होगा। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में उज्जैन, नासिक, प्रयागराज के कुंभ सफल रूप से आयोजित हुए हैं।
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उसी प्रकार हरिद्वार कुंभ भी संपन्न होगा। साक्षी महाराज ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि इस बार ममता सरकार की विदाई तय है।
वहीं, महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को कुंभ मेले की कमान अपने हाथों में लेनी चाहिए। उन्होंने सरकार को भ्रमित कर रहे अधिकारियों को हटाने की मांग की है।
महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि इन अधिकारियों के कारण ही कुंभ की व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे सरकार की छवि पर भी असर पड़ा। लिहाजा अब अनुभवी अधिकारियों को कमान सौंपनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है।
इतने विशाल धार्मिक आयोजन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए, इसका सरकार को विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार कुंभ इतना भव्य होना चाहिए कि प्रधानमंत्री प्रयागराज को भूलकर हरिद्वार की प्रशंसा करें।
महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि शासन-प्रशासन चाहे तो कुंभ मेला अब भी दिव्य और भव्य हो सकता है। इसके लिए अधिकारियों को इच्छाशक्ति दिखानी होगी। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि साक्षी महाराज अखाड़े के महामंडलेश्वर के रूप में पूरी दुनिया में सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
इस दौरान श्रीमहंत लखन गिरि, श्रीमहंत रामरतन गिरि, अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष श्रीमहंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, श्रीमहंत दिनेश गिरि, श्रीमहंत ओंकार गिरि, महंत केशवपुरी, श्रीमहंत राधे गिरि, महंत नीलकंठ गिरि, महंत नरेश गिरि मौजूद थे।