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उत्तराखंड: प्रदेश के लिए कारगर हो सकती है तेलंगाना की 5-जी एंबुलेंस, आपात चिकित्सा को मिलेगी नई रफ्तार

Fri, 04 Sep 2026 11:30 AM IST
Renu Saklani आफताब अज़मत, हैदराबाद।
आफताब अज़मत, हैदराबाद। Published by: Renu Saklani Updated Fri, 04 Sep 2026 11:30 AM IST
सार

पहाड़ी इलाकों में मरीजों को समय पर इलाज तक पहुंचाना आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है। 5जी तकनीक से लैस एंबुलेंस सफर के दौरान ही गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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5G Ambulance in Uttarakhand Telangana Model May Revolutionize Emergency Medical Care in Remote
हैदराबाद स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज मैं उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देती प्रिंसिपल डॉ. एस सी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर मरीजों को समय पर उच्चस्तरीय इलाज दिलाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों से मरीजों को देहरादून या हल्द्वानी जैसे बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने में अक्सर कई घंटे लग जाते हैं, जिससे ‘गोल्डन ऑवर’ में जरूरी इलाज नहीं मिल पाता। इस भौगोलिक संकट का सटीक समाधान हैदराबाद स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की अत्याधुनिक 5जी कनेक्टेड एंबुलेंस सेवा बन सकती है।

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पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित मीडिया दौरे पर संस्थान पहुंची टीम से बातचीत में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. एस. सीथा लक्ष्मी ने बताया कि तेलंगाना में सफलतापूर्वक संचालित यह 5जी मॉडल उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है। डॉ. लक्ष्मी के अनुसार, पहाड़ों के कठिन रास्तों पर जब अस्पताल पहुंचने में वक्त लगता है, तब यह तकनीक रास्ते में ही मरीज को आईसीयू जैसा बैकअप देती है।

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इमरजेंसी रूम और सर्जिकल टीम पूरी तरह तैयार
5जी तकनीक से लैस इस एंबुलेंस में लगे अत्याधुनिक उपकरण मरीज के वाइटल्स, ईसीजी और अन्य जरूरी डेटा रियल-टाइम में अस्पताल के विशेषज्ञों तक पहुंचाते हैं। विशेषज्ञ डॉक्टर स्क्रीन पर मरीज की स्थिति देखकर एंबुलेंस कर्मियों को तुरंत प्राथमिक व जीवनरक्षक निर्देश देते हैं। साथ ही, मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही इमरजेंसी रूम और सर्जिकल टीम पूरी तरह तैयार हो जाती है।

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इसके अलावा, यह संस्थान सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है। देशभर के 20 ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में कुल 1,755 एमबीबीएस सीटें हैं, जहां सालाना फीस (हॉस्टल सहित) मात्र करीब एक लाख रुपये है। सीटों का विभाजन 15 प्रतिशत ऑल इंडिया, 50 प्रतिशत स्टेट और 35 प्रतिशत बीमित व्यक्ति कोटे में होता है। यदि उत्तराखंड में भी ऐसा कॉलेज स्थापित होता है तो स्थानीय युवाओं को कम खर्च में डॉक्टर बनने का बड़ा अवसर मिलेगा।



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1,044 बेड वाले इस स्वास्थ्य परिसर में 159 आईसीयू बेड, सुपर स्पेशियलिटी केयर और 30 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधाएं मौजूद हैं। डॉ. लक्ष्मी का यह सुझाव स्पष्ट करता है कि डिजिटल स्वास्थ्य तकनीक अपनाकर उत्तराखंड अपने स्वास्थ्य तंत्र को एक नया और मजबूत आयाम दे सकता है।



 

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