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Haridwar: 'नरेंद्र मोदी को 2024 में फिर बनना चाहिए पीएम', 'सेंगोल' सौंपने वाले मदुरै अधीनम के पुजारी का बयान
Fri, 26 May 2023 09:46 AM IST
रेनू सकलानी
एएनआई
एएनआई
Published by: रेनू सकलानी
Updated Fri, 26 May 2023 09:46 AM IST
सार
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 14 अगस्त, 1947 को ऐतिहासिक राजदंड सेंगोल को अंग्रेजों से भारत में स्थानांतरण के प्रतीक के रूप में प्राप्त किया गया था। मदुरै के 293वें प्रधान पुजारी हरिहर देसिका स्वामीगल 28 मई को नई संसद के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेंगोल सौंपेंगे।
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sri harihara desika swamigal 293rd head priest of madurai adheenam
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पीएम मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्हें विश्व स्तर पर सराहना मिल रही हैं। लोगाें के लिए वह अच्छा काम कर रहे है। उन्हें 2024 में फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहिए। यह कहना है 28 मई को नई संसद के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेंगोल सौंपने वाले मदुरई अधीनम के मुख्य पुजारी श्री हरिहर देसिका स्वामीगल का।
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मदुरै के 293वें प्रधान पुजारी हरिहर देसिका स्वामीगल ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, कि विश्व के नेता हमारे पीएम की सराहना कर रहे हैं, यह हम सभी के लिए गर्व की बात की। कहा कि नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर पीएम मोदी से मिलूंगा और उन्हें सेंगल भेंट करूंगा। थिरुववदुथुराई अधीनम मठ के 31 सदस्य 28 मई को होने वाले कार्यक्रम के लिए दो जत्थों में चार्टर्ड फ्लाइट से नई दिल्ली पहुंचेंगे।
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राजदंड को बनाने में लगा था एक महीने का समय
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 14 अगस्त, 1947 को ऐतिहासिक राजदंड सेंगोल को अंग्रेजों से भारत में स्थानांतरण के प्रतीक के रूप में प्राप्त किया गया था। सेंगोल को ऐतिहासिक राजदंड को बनाने वाले युम्मीदी बंगारू ज्वैलर्स के अध्यक्ष वुम्मिदी सुधाकर ने कहा, इसे बनाने में हमें एक महीने का समय लगा।
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यह सिल्वर और गोल्ड प्लेटेड से है। बताया कि मैं तब 14 साल का था। उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताया। 28 मई को मदुरै अधीनम के प्रधान पुजारी द्वारा सेंगोल को पीएम मोदी को सौंपा जाएगा। मदुरै अधीनम के पुजारियों का सेंगोल को सौंपने में अहम स्थान है। आजादी के बाद जब देश को अपना पहला प्रधानमंत्री मिल रहा था, उस दौरान भी सत्ता हस्तांतरण के मौके पर मदुरै अधीनम के प्रधान पुजारी ने ही राजदंड देकर परंपरा का निर्वाहन किया था।