फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Lunar Eclipse 2018 scientist special instrument

चंद्र ग्रहण 2018: आखिर क्यों ग्रहण देखने के लिए वैज्ञानिकों ने बनाया बेहद खास उपकरण

Thu, 01 Feb 2018 03:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Thu, 01 Feb 2018 03:07 PM IST
विज्ञापन
Lunar Eclipse 2018 scientist special instrument
lunar eclipse 2018 - फोटो : demo

भारत भर में बुधवार को पड़ा पूर्ण चंद्र ग्रहण अद्भुत रहा। ग्रहण से चंद्रमा समेत अन्य ग्रहों पर प्रभाव के अध्ययन के लिए दिल्ली के साथ-साथ जापान के वैज्ञानिक भी नैनीताल पहुंचे थे। वैज्ञानिकों ने 104 सेंटीमीटर संपूर्णानंद दूरबीन और विशेष पोलेरीमीटर उपकरण से चंद्रग्रहण का अध्ययन किया।

विज्ञापन


आर्य भट्ट रिसर्च संस्थान (एरीज) के डायरेक्टर डॉ. एके पांडेय, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. एचपी सिंह और जापान की निशिहामा एस्ट्रोनॉमिकल वेधशाला के वैज्ञानिक प्रोफेसर आइतो ने बुधवार को एरीज सभागार में बताया कि 31 जनवरी को शाम पांच बजकर 18 मिनट से चंद्रग्रहण शुरू हुआ।
विज्ञापन


इस दौरान उन्होंने एरीज की 104 सेंटीमीटर संपूर्णानंद दूरबीन से इमेजिंग पोलिरीमीटर का प्रयोग करते हुए पोलरिमैट्रिक प्रेक्षण किया। यह पोलेरीमीटर उपकरण एरीज के वैज्ञानिकों और अभियंताओं ने बनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

होगा वायुमंडल के ध्रुवीय गुणों को समझने का प्रयास

Lunar Eclipse 2018 scientist special instrument
Atmosphere - फोटो : www.asc-csa.gc.ca
इसमें ग्रहण की घटनाओं के दौरान पोलेरीमेट्रिक प्रेक्षणों का डाटा इकट्ठा किया जाता है। इन प्रेक्षणों की तुलना पृथ्वी के वायुमंडलीय गुणों तापमान, बादल, ऐरोसोल आदि से करके पृथ्वी के वायुमंडल के ध्रुवीय गुणों को समझने का प्रयास किया जाएगा। इससे पहले चार अप्रैल 2015 को हुए चंद्र ग्रहण का प्रेक्षण जापान की आठ मीटर सुबारू दूरबीन से किया गया था।

ध्रुवीकरण की प्रक्रिया समझने में मिलेगी मदद
वैज्ञानिकों ने कहा कि इन पोलरीमैट्रिक (ध्रुवीय) प्रेक्षणों की तरंगदैर्ध्य और समय भिन्नता के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पोलराइजेशन (ध्रुवीकरण) का मुख्य कारण अक्षांशीय वायुमंडलीय असमानता के साथ-साथ वायुमंडल में प्रथम संचरण के दौरान होने वाला दोहरा फैलाव है।

इस अध्ययन से हमें पृथ्वी में वायुमंडल के कारण होने वाले ध्रुवीकरण की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में हमारे लिए अन्य ग्रहों के वायुमंडल की जानकारी करना संभव हो सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed