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Lok Sabha Elections 2024: फ्लैशबैक... प्रचार के लिए 65 हजार मिले, प्रत्याशी ने 60 हजार लौटा दिए
Fri, 22 Mar 2024 02:41 PM IST
रेनू सकलानी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Fri, 22 Mar 2024 02:41 PM IST
सार
आईएएस धर्म सिंह रावत प्रत्याशी ने प्रचार के लिए 65 मिले थे, पांच हजार खर्चे और 60 हजार लौटा दिए। उन्होंने 1991 में जनता दल के टिकट पर गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
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चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय राजनीति में जहां पैसा और ताकत अक्सर चुनावों की दिशा तय करते हैं, ऐसे कुछ ही व्यक्ति हुए जो अपनी निष्ठा, ईमानदारी और लोगों की सेवा के प्रति समर्पण के लिए खड़े हुए थे। ऐसे ही एक शख्स थे आईएएस धर्म सिंह रावत, जिन्होंने 1991 में जनता दल के टिकट पर गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
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लोकसभा सीट के लिए रावत का अभियान किसी अन्य से अलग था। जबकि अधिकांश उम्मीदवार दावतों, रैलियों और अन्य खर्चों पर बड़ी रकम खर्च करते थे, रावत ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपने स्कूटर पर 17 दिनों तक 300 से 350 किमी के क्षेत्र को कवर करते हुए प्रचार किया।
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व्यावहारिक दृष्टिकोण लोगों को आया पसंद
यह न केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों तक पहुंचने के प्रति उनके समर्पण को प्रदर्शित करता है बल्कि न्यूनतम खर्च पर चुनाव लड़ने में उनके विश्वास को भी प्रदर्शित करता है। वह स्कूटर से प्रचार करते हुए व्यक्तिगत स्तर पर मतदाताओं से जुड़े, उनकी चिंताओं को सुना। यह व्यावहारिक दृष्टिकोण लोगों को पसंद आया।
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धर्म सिंह रावत चुनाव हार गए, लेकिन 45 हजार सम्मानजनक वोट लाने में कामयाब रहे। अपने प्रचार में राष्ट्रीय पार्टी के वह पहले उम्मीदवार थे जिन्होंने 65 हजार रुपये में से कुल 5000 रुपये खर्च किये। उन्होंने चुनावी राजनीति में जिम्मेदार आचरण की मिसाल कायम करते हुए शेष 60000 रुपये पार्टी को लौटा दिए।
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राजनीति में मूल्यों की गिरावट को देखते हुए उन्होंने जनता दल से इस्तीफा दे दिया था। 1930 में जन्मे पौड़ी निवासी धर्म सिंह 1955 बैच के यूपी पीसीएस अधिकारी थे। 1971 में उन्हें आईएएस कैडर मिला। वह बेहद ईमानदार थे। उन्हें 1991 में लोक सभा चुनाव स्कूटर से चुनाव लड़ने की खूब प्रशंसा मिली थी। जो बात धर्म सिंह को अन्य उम्मीदवारों से अलग करती थी, वह थी पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति उनकी प्रतिबद्धता। वह दिखावटी प्रदर्शन व फिजूलखर्ची के सख्त खिलाफ थे।
प्रस्तुति : शीशपाल गुसाईं