50 साल के ताऊ ने नाबालिग भतीजी से की दरिंदगी, अब आखिरी सांस तक जेल में कटेगी जिंदगी
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विशेष सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म करने वाले 50 वर्षीय अभियुक्त को अंतिम सांस तक कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अदालत ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 नाल्सा स्कीम के तहत उत्तराखंड सरकार (जिला मजिस्ट्रेट) को पीड़िता को सात लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश पारित किए हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा को पीड़़िता के पुनर्वास, उसकी शिक्षा और कौशल विकास किए जाने के लिए आदेशित किया है।
क्षेत्र निवासी पीड़िता के बचपन में ही माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। वह अपने ताऊ के संरक्षण में उसके साथ रहती थी। ताऊ नाबालिग भतीजी से डेढ़ वर्ष तक दुष्कर्म करता रहा, जिससे वह गर्भवती हो गई, उसके बाद उसका गर्भपात हो गया तो ताऊ ने भ्रूण को कहीं फेंक दिया।
पीड़िता ने 18 जुलाई 2018 को चाची और 20 जलाई 2018 को अपने भाई को इसकी जानकारी दी। ताऊ ने उसे धमकी दी थी कि किसी को बताया तो जान से मार देगा। बाद में पीड़िता के भाई ने दन्यां थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
विधि के शासन में आरोपी को आजावीन कारावास दिया जाना उचित
मामले का विचारण विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो के न्यायालय में हुआ। अभियोजन की ओर से न्यायालय में दस गवाह परीक्षित कराए गए। न्यायालय में आरोपी को धारा 376 (2) में अंतिम सांस तक कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
धारा 201 में तीन साल की सजा और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने जेल अधीक्षक को भी निर्देशित किया है कि वह ऐसे अपराधी को वह लाभ न दें, जो अन्य कैदियों को उनके अच्छे व्यवहार के लिए दिया जाता है। आरोपी अंतिम सांस तक जेल में ही रहेगा।
न्यायाधीश ने फैसले में टिप्पणी करते हुए रामचरित मानस के किष्किंधा कांड की चौपाई अनुज बधु, भगनी सुत नारी, सुन सत ये कन्या समचारी, इन्हें कुदृष्टि विलोपे जोई, ताहि बधे कछु ना होई, का उदाहरण देते हुए कहा कि वेदों में और स्मृतियों में इस प्रकार के कृत्य के लिए मृत्युदंड की अवधारणा की गई है, परंतु विधि के शासन को संरक्षण किए जाने के लिए न्यायालय बाध्य है।
जब अपराधी ने अपराध किया था तो उस समय पीड़िता की उम्र 12 वर्ष से अधिक थी। ऐसे में दंडादेश के स्तर पर आजावीन कारावास दिया जाना ही उचित है। साथ ही निर्भया प्रकोष्ठ को भी इस निर्णय की प्रतिलिपि आवश्यक दिशा निर्देशों के साथ प्रेषित करने के आदेश दिए।