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यादों में स्वर कोकिला: देशभक्ति गीतों का जिक्र छिड़ा तो भर आईं लता दीदी की आंखें, डॉ. निशंक ने साझा किया संस्मरण
Mon, 07 Feb 2022 04:38 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अंकित कुुमार गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
अंकित कुुमार गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 07 Feb 2022 04:38 PM IST
सार
सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के बारे में यह सर्वविदित था कि वे आसानी से किसी से नहीं मिलतीं, लेकिन जिन्हें भी उनसे मिलने और बातचीत करने का मौका मिला, उनके लिए उन अनमोल पलों से बढ़कर शायद ही कुछ हो सकता है।
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डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और स्व. लता मंगेशकर
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
स्वर कोकिला लता मंगेशकर के दिल में देशभक्ति की भावना किस कदर कूट-कूटकर भरी थी, इसका अंदाजा मुख्यमंत्रित्व काल में डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की उस भेंट से सहज ही होता है, जब देशभक्ति गीतों पर चर्चा करते-करते उनकी आंखों में आंसू छलक आए। बकौल डॉ. निशंक लता दीदी की आंखों में आंसू देखकर वे निशब्द हो गए थे।
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सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के बारे में यह सर्वविदित था कि वे आसानी से किसी से नहीं मिलतीं, लेकिन जिन्हें भी उनसे मिलने और बातचीत करने का मौका मिला, उनके लिए उन अनमोल पलों से बढ़कर शायद ही कुछ हो सकता है। इनमें से एक पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी हैं।
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तकरीबन डेढ़ घंटे तक इंतजार किया
उन्होंने लता दीदी से कई बार मुलाकात की, लेकिन वर्ष 2010 में मुख्यमंत्री रहते हुए एक मुलाकात डॉ. निशंक के लिए खास थी, जब उन्होंने तकरीबन डेढ़ घंटे तक इंतजार किया। इसके बाद जो कुछ हुआ, वह अविस्मरणीय रहा। डॉ. निशंक बताते हैं कि वह अपनी पुस्तक ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भेंट करने मुंबई स्थित उनके आवास पर पहुंचे थे। उस समय लता दीदी चिकित्सक के यहां जाने के लिए निकल रही थीं। इस पर उन्होंने लौटकर मिलने की बात कही।
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करीब डेढ़ घंटे बाद लता दीदी लौटीं तो उनसे बातचीत शुरू हुई। उन्होंने पुस्तक भेंट की तो लता दीदी देशभक्ति गीतों पर चर्चा करने लगीं। अचानक उनकी आंखें भर आईं। बकौल डॉ. निशंक उन्हें उस दिन पता चला कि लता दीदी के अंतर्मन में गीत-संगीत के साथ भक्ति प्रेम का अथाह सागर है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना असंभव है। डॉ. निशंक ने बताया कि उन्होंने लता दीदी से उनके लिखे देशभक्ति गीतों का स्वर देने का अनुरोध किया था।
उन्होंने कुछ गीत गुनगुनाए भी और स्वर देने का भरोसा दिया था। डॉ. निशंक ने बताया कि देश और दुनिया में जहां भी गए, हर जगह के लोगों में उनके प्रति विशेष सम्मान मिला। हर कोई उनकी आवाज के जादू और देशभक्ति का कायल दिखा। उनके निधन पर डॉ. निशंक ने कहा कि देश ही नहीं दुनिया ने एक नायाब हीरे को खो दिया है, एक महान शख्सियत हमारे बीच से चला गया। संवाद
रुड़की के साहित्यकार ने दीदी की मौजूदगी में रचा था दोहा
पूर्व मुख्यमंत्री के साथ रुड़की के साहित्यकार डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ भी थे। उस समय भी वे अस्वस्थ थीं और अस्पताल जा रही थीं। उसी समय डॉ. अरुण ने एक दोहा ‘लय और ताल दोनों मिले, जीवन है संगीत, तानसेन की आत्मा, बैजू की है प्रीत’ रचा। यह दोहा उन्होंने लता जी को सुनाया, तो वह गदगद हो गईं और उनसे लगभग 15 मिनट बातचीत की।