फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Labour Department Not a single case regarding minimum wage was registered throughout entire year Uttarakhand

Uttarakhand: न्यूनतम वेतन पर पूरे साल में नहीं दर्ज हुआ एक भी मामला, जानें प्रदेश में श्रमिकों की स्थिति

Sat, 23 May 2026 05:37 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी/चिन्यालीसौड़।
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी/चिन्यालीसौड़। Published by: Renu Saklani Updated Sat, 23 May 2026 05:37 PM IST
सार

उत्तराखंड में न्यूनतम वेतन पर पूरे साल में एक भी मामला नहीं दर्ज हुआ। बोनस के दावे में 37.67 करोड़ दिलाए गए। सबसे ज्यादा 28,535 विवाद बोनस के ही दर्ज हुए हैं।

विज्ञापन
Labour Department Not a single case regarding minimum wage was registered throughout entire year Uttarakhand
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग पर श्रमिकों की नाराजगी कम नहीं हुई है लेकिन वर्तमान न्यूनतम वेतन दिए जाने को लेकर पूरे राज्य में श्रमिकों और कंपनियों के बीच कोई विवाद भी नहीं हुआ है।

विज्ञापन

पूरे वर्ष में राज्य के एक भी श्रमिक ने इस बात की शिकायत दर्ज नहीं कराई है कि उसे निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम का भुगतान किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में श्रमिकों और कंपनियों के बीच सबसे अधिक विवाद बोनस को लेकर सामने आया। श्रमिकों ने अधिक बोनस का दावा लेकर श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें अधिकांश मामलों में श्रमिकों के वाद सही पाए गए और श्रम विभाग ने कंपनियों से श्रमिकों को उचित बोनस का भुगतान कराया।
विज्ञापन


श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूरे वित्त वर्ष में 28535 श्रमिकों ने पर्याप्त बोनस न दिए जाने को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। विभाग ने इन सभी मामलों में कुल मिलाकर 37,67,15,430.75 रुपये का बोनस भुगतान कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन


तनाव के बाद श्रम विभाग ने स्पष्ट किया
इसके अलावा ग्रेच्युटी के रूप में हुए विवाद में श्रमिकों को 1.61 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। समान वेतन अधिनियम के अंतर्गत श्रमिकों को 16.79 लाख रुपये, वेतन संबंधी अन्य वाद में 5.41 लाख रुपये और प्रतिपालक मामलों में 85.36 लाख रुपये का भुगतान श्रमिकों को किया गया।

न्यूनतम वेतन पर पैदा हुए तनाव के बाद श्रम विभाग ने स्पष्ट किया था कि उत्तराखंड में अकुशल, अर्धकुशल और कुशल सभी वर्ग के श्रमिकों का न्यूनतम वेतन पड़ोसी राज्यों से अधिक है। विभाग ने श्रमिक संगठन के नेताओं, औद्योगिक कंपनियों के संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर श्रमिकों से बेहतर तालमेल स्थापित कर संघर्ष टालने का सुझाव दिया था। कंपनियों में शिकायत निवारण समिति गठित करने और चिकित्सा सहायता व्यवस्था बेहतर बनाने के भी सुझाव दिए गए हैं।


ये भी पढ़ें...Uttarakhand: एवरेस्ट पर आईटीबीपी की पर्वतारोही और खटीमा की बेटी का परचम, तिला सेन ने रचा इतिहास

श्रम विभाग श्रमिकों का हित सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पिछले एक साल में पूरे राज्य में एक भी श्रमिक ने इस बात की शिकायत नहीं की कि उसे निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया गया। यह बताता है कि राज्य में श्रमिकों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। -अनिल चंद्र पेटवाल, अपर श्रम आयुक्त 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed