{"_id":"64adb94452bc47a1f800d158","slug":"kuldeep-is-tasting-pahari-cuisine-in-new-york-dehradun-news-c-5-drn1005-197331-2023-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: न्यूयाॅर्क में कुलदीप चखा रहे हैं पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: न्यूयाॅर्क में कुलदीप चखा रहे हैं पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद
विज्ञापन
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के रहने वाले शेफ कुलदीप सात समंदर पार न्यूयाॅर्क में वहां के लोगों को पहाड़ी अनाज से बने व्यंजनों का स्वाद चखा रहे हैं। कुलदीप न्यूयाॅर्क में उत्तराखंड के मोटे अनाज और अन्य भोज्य पदार्थों को पहचान देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इससे वह वहां देश और उत्तराखंड का नाम भी रोशन कर रहे हैं।
कुलदीप प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से मोटे अनाज और पहाड़ी व्यंजनों को नए-नए तरीकों से बढ़ावा देने के मुरीद हैं। कुलदीप ने बताया, इससे देश-विदेश में उत्तराखंड के परंपरागत अनाज को जहां बढ़ावा मिलेगा, वहीं किसानों की आय बढ़ने से पलायन की समस्या रोकने में भी मदद मिलेगी। कुलदीप न्यूयाॅर्क के एक रेस्टोरेंट में बतौर सीनियर शेफ कार्यरत हैं।
उन्होंने न्यूयाॅर्क के जेम्स बियर्ड फाउंडेशन संस्थान में पहाड़ी खाना बनाकर अप्रवासी भारतीयों समेत अमेरिकन और वहां रह रहे अन्य देशों के लोगों को भी इसका स्वाद चखाया। वह मंडुआ की रोटी, बाजरा की चपाती, भांग की चटनी का स्वाद अक्सर वहां पर लोगों को चखाते रहते हैं। कुलदीप बताते हैं, पहाड़ी परंपरागत व्यंजनों का नए तरीकों से परोस कर देश और विदेशों तक पहचान दिलाने का उनका हमेशा से सपना रहा है। इससे युवा पीढ़ी को रोजगार भी मिल सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
कुलदीप प्रधानमंत्री नरेंद्र सिंह मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से मोटे अनाज और पहाड़ी व्यंजनों को नए-नए तरीकों से बढ़ावा देने के मुरीद हैं। कुलदीप ने बताया, इससे देश-विदेश में उत्तराखंड के परंपरागत अनाज को जहां बढ़ावा मिलेगा, वहीं किसानों की आय बढ़ने से पलायन की समस्या रोकने में भी मदद मिलेगी। कुलदीप न्यूयाॅर्क के एक रेस्टोरेंट में बतौर सीनियर शेफ कार्यरत हैं।
विज्ञापन
उन्होंने न्यूयाॅर्क के जेम्स बियर्ड फाउंडेशन संस्थान में पहाड़ी खाना बनाकर अप्रवासी भारतीयों समेत अमेरिकन और वहां रह रहे अन्य देशों के लोगों को भी इसका स्वाद चखाया। वह मंडुआ की रोटी, बाजरा की चपाती, भांग की चटनी का स्वाद अक्सर वहां पर लोगों को चखाते रहते हैं। कुलदीप बताते हैं, पहाड़ी परंपरागत व्यंजनों का नए तरीकों से परोस कर देश और विदेशों तक पहचान दिलाने का उनका हमेशा से सपना रहा है। इससे युवा पीढ़ी को रोजगार भी मिल सकेगा।
विज्ञापन