उत्तराखंड: किसानों ने फिर भरी हुंकार, धान के जायज मूल्य को लेकर शुरू किया आमरण अनशन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिलने के विरोध में किसानों ने आरपार की लड़ाई शुरू कर दी है। किसानों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है। रुद्रपुर गल्ला मंडी में धरने के पांचवें दिन बिरिया भूड़ सितारगंज के किसान त्रिलोचन सिंह (77) आमरण अनशन पर बैठे।
इस दौरान किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया। इस दौरान धान की आवक न होने से रुद्रपुर गल्ला मंडी में दिनभर सन्नाटा छाया रहा।अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए धरने पर बैठे किसानों ने कहा कि देश को अनाज देने वाले किसानों को अपनी जायज मांगों के लिए भी आमरण अनशन करना पड़ रहा है।
कसानों की गाढ़ी कमाई से बिचौलिये और मुनाफाखोर विदेशों की सैर कर रहे हैं। सरकार की ओर से 1750 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित होने के बावजूद मुनाफाखोर इसे लागू नहीं होने दे रहे हैं। मजबूरी में किसानों को 1200 रुपये क्विंटल धान बेचना पड़ रहा है। किसान इतने दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन आज तक किसी जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी ने उनकी सुध नहीं ली।
तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजिंदर विर्क और भारतीय किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को किसान की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। इस दौरान साहब सिंह विर्क, जसवीर सिंह, प्रशांत राणा, गुरजीत, दर्शन सिंह, दीप नारायण मौर्या, सुखदेव सिंह, अमनदीप सिंह समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
किसान त्रिलोचन सिंह ने अमेरिका के खिलाफ रखा था उपवास
रुद्रपुर गल्ला मंडी में धान के समर्थन मूल्य दिलाने के लिए आमरण अनशन पर बैठे अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष त्रिलोचन सिंह को वर्ष 1965 में पाक युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का अमेरिका के खिलाफ शुरू किए गए उपवास की यादें ताजा हो गईं।
किसान त्रिलोचन सिंह ने बताया कि वह बंगाल इंजीनियर्स में लांसनायक के रूप में तैनात थे। वर्ष 1965 में जब पाकिस्तान के साथ जंग चल रही थी तो अमेरिका का पाक को समर्थन कर रहा था।
इस कारण अमेरिका ने भारत के लिए गेहूं का निर्यात बंद कर दिया था, जिससे भारत में अचानक अनाज की कमी हो गई थी। उस अनाज संकट के खिलाफ अपना सहयोग करने के लिए उस समय उरी (जम्मू कश्मीर) में सभी सैनिकों ने सोमवार को भोजन न करने के लिए उपवास रखना शुरू किया।
उपवास रखने वाले सैनिकों में वह भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि उस समय विदेशी ताकतों के खिलाफ उपवास रखने वाले सैनिक को आज किसान के रूप में अपने ही हुक्मरानों के खिलाफ भूख हड़ताल करनी पड़ रही है।