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उत्तराखंड कर्मकार बोर्ड : कर्मचारियों को जिस दिन हटाया, उसी दिन से होंगे बहाल, श्रम मंत्री ने दिए आदेश
Sat, 03 Apr 2021 12:31 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 03 Apr 2021 12:31 PM IST
सार
- कर्मकार कल्याण बोर्ड से हटाए गए कर्मचारियों को दोबारा रखने को लेकर श्रम मंत्री हरक सिंह ने दिए आदेश, कहा- सरकार की पहली जिम्मेदारी लोगों को रोजगार देना
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हरक सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
उत्तराखंड भवन सन्निर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड से सचिव दीप्ति सिंह को हटाने के बाद अब श्रम मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने एक और आदेश जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जो कर्मचारी पूर्ववर्ती सरकार में कर्मकार बोर्ड से हटाए गए थे, उन्हें उसी तिथि से बहाल किया जाएगा।
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दरअसल, त्रिवेंद्र सरकार में कर्मकार बोर्ड को भंग करते हुए पहले सचिव दमयंती रावत को हटाया गया था। इसके बाद हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। सरकार ने शमशेर सिंह सत्याल को नया अध्यक्ष बनाया था और सचिव पद पर पीसीएस अफसर दीप्ति सिंह को जिम्मेदारी सौंपी थी।
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नए बोर्ड ने सबसे पहले हरक सिंह रावत के कार्यकाल में रखे गए 38 कर्मचारियों को हटाने का आदेश जारी किया था। इसके बाद सरकार ने कर्मकार बोर्ड का एजी ऑडिट शुरू किया था। तमाम विवादों के बीच बोर्ड के कार्यकाल की जांच भी कराई जा रही थी।
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इस बीच, प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो गया। परिवर्तन के बाद श्रम मंत्री हरक सिंह रावत ने सबसे पहले बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह को उनके पद से हटाते हुए मधु नेगी चौहान को सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब मंत्री ने नई सचिव को आदेश दिया है कि जो 38 कर्मचारी जिस तिथि को हटाए गए थे, उन्हें उसी तिथि से बहाल किया जाए। मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि सरकार की पहली जिम्मेदारी लोगों को रोजगार देना है।
बता दें कि उत्तराखंड भवन सन्निर्माण एवं कर्मकार कल्याण बोर्ड की पूर्व सचिव दमयंती रावत अकाउंटेंट जनरल (एजी) ऑडिट टीम के निशाने पर आ गई थीं। जांच के दौरान सामने आने वालीं वित्तीय गड़बड़ियों पर ऑडिट टीम ने बोर्ड से जवाब मांगा। बोर्ड की सचिव दीप्ति सिंह ने एक पत्र के साथ सभी सवाल दमयंती रावत को प्रेषित कर दिए थे।
दमयंती रावत को कर्मकार बोर्ड के सचिव पद से हटा दिया गया था। इसके बाद सरकार ने बोर्ड भंग करते हुए वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत को भी अध्यक्ष पद से हटा दिया था। फिर बोर्ड में हुए वित्तीय लेन-देन का एजी ऑडिट शुरू हो गया था। ऑडिट टीम ने सभी दस्तावेज खंगालने के बाद काफी आपत्तियां जताईं।
इसमें ईएसआई अस्पताल के लिए 50 करोड़ का लोन स्वीकृत करने से लेकर कई और वित्तीय मामलों से संबंधित सवाल शामिल थे। इन सभी आपत्तियों पर एजी टीम ने कर्मकार बोर्ड से जवाब मांगा था।