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रामपुर तिराहा कांड: ...टूटती जा रही इंसाफ की उम्मीद
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 02 Oct 2017 11:30 AM IST
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rampur tiraha kand
- फोटो : file photo
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उत्तराखंड के रामपुर तिराहा कांड में इंसाफ की उम्मीद अब टूटने लगी है। 23 साल की लंबी लड़ाई के बावजूद एक भी मुकदमे की सुनवाई निर्णायक दौर में नहीं पहुंच पाई है।
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तीन मुकदमों की फाइल आरोपी पुलिसकर्मियों की मौत की वजह से बंद हो चुकी है, जो मुकदमे बचे भी हैं, उनमें कमजोर पैरोकारी का पूरा फायदा आरोपी पुलिसकर्मियों को मिल रहा है। फायरिंग का मुख्य मुकदमा तो सरकार द्वारा अनुमति न दिए जाने के कारण चल ही नहीं पाया। भाजपा और कांग्रेस ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, मगर दोषियों को सजा दिलाने में उन्होंने क्या किया, शायद ही इसका जवाब मिल पाए।
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एक अक्तूबर 1994 की रात उत्तराखंड के इतिहास में खून से लिखी गई थी। उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे उत्तराखंड के बेकसूर लोगों पर यूपी पुलिस ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर लाठीचार्ज करने के साथ फायरिंग की थी। फायरिंग में सात उत्तराखंडियों की मौत होने के साथ ही 17 जख्मी हो गए थे। यहीं नहीं जान बचाने को जंगलों की तरफ गईं महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ किया गया था। देश भर में रामपुर तिराहा कांड गरमाया तो राजनीतिक दलों पर उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने का दबाव बढ़ गया था।
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उस समय जिस तरह का माहौल बना था उससे उम्मीद जगी थी कि बेकसूरों पर फायरिंग और महिलाओं की अस्मत लूटने वालों को एक दिन सजा जरूर मिलेगी। सत्ता में आने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने कड़े तेवर दिखाए, मगर वक्त के साथ उनके केस भी ढीले पड़ते चले गए। 23 साल बाद भी यह लड़ाई बेनतीजा रही है। पीड़ितों को इंसाफ की उम्मीद थी, जो अब जवाब देनी लगी है।
इस मामले में सीबीआई की तरफ से पुलिस के खिलाफ सात अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए थे, जिनमें फायरिंग के अलावा रेप, फर्जी बरामदगी, लाश को गायब करने जैसे संगीन आरोप थे। फायरिंग मामले में तो आरोपी अधिकारियों को यूपी सरकार ने मुकदमे चलाने की अनुमति न देकर राहत दे दी थी। मुजफ्फरनगर की कोर्ट में बाकी मामलों में कमजोर पैरोकारी इंसाफ की उम्मीदों पर पानी फेरने का सबब बन गई।
इन मामलों में सुनवाई
- रामपुर तिराहे पर हुए रेप के मामले में सीबीआई बनाम मिलाप सिंह मामले में आरोप तय किए जा चुके हैं। फिलहाल इस मामले में गवाही चल रही है, जबकि रेप के दूसरे मामले में सीबीआई बनाम राधा मोहन द्विवेदी में हाईकोर्ट से स्टे चल रहा है।
- सीबीआई बनाम ब्रजकिशोर सिंह। कांधला के तत्कालीन थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह पर आरोप है कि उत्तराखंड आंदोलनकारियों पर पुलिस फायरिंग के बाद उन्होंने उत्तराखंडियों की तलाशी में फर्जी तौर पर हथियार बरामदगी दिखाई और मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में आरोप तय हो चुके हैं और सुनवाई चल रही है। ब्रज किशोर इंस्पेक्टर पद से कई बरस पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इन मुकदमों की फाइलें हुईं बंद
- कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक मोती सिंह ने ही उत्तराखंडियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। सीबीआई ने मोती सिंह को आरोपी बनाया था। उनकी मौत के कारण यह मामला कोर्ट में समाप्त हो गया है।
- रामपुर तिराहा कांड में फर्जी हथियार बरामदगी का तीसरा मामला सीबीआई बनाम दाताराम आजाद का था। उप निरीक्षक दाताराम आजाद की मौत के कारण यह फाइल भी बंद हो गई।
- एक अन्य मामले में छपार एसओ रहे राजबीर सिंह पर जीडी में फर्जी लिखापढ़ी करने का आरोप था। थानाध्यक्ष पर आरोप तय हुए थे, लेकिन राजबीर सिंह की भी मौत होने के कारण मुकदमे की फाइल बंद हो चुकी है।
क्या हुआ था उस काली रात
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो पृथक राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी 36 बसों में सवार होकर दिल्ली में दो अक्तूबर को प्रस्तावित रैली में भाग लेने जा रहे थे। गुरुकुल नारसन में आंदोलनकारियों के बैरियर तोड़कर आगे बढ़ जाने के बाद यूपी पुलिस ने रामपुर तिराहे पर उन्हें रोकने की योजना बनाई थी। पूरे इलाके को सील कर आंदोलनकारियों की बसों को रोक लिया था। आंदोलनकारियों ने सड़कों पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी थी। आंदोलनकारी दिल्ली जाने की जिद पर अड़े थे। रात में बारह बजे के करीब पुलिस ने आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया। इसी बीच फायरिंग भी शुरू हो गई। करीब दो बजे तक पुलिस का दमन चक्र चलता रहा। 400 आंदोलनकारियों को पकड़कर सिविल लाइंस थाने ले जाया गया था। सुबह हुई तो महिलाओं की अस्मत लूटे जाने की बात सामने आई।
काला दिवस मनाएंगे
चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे ने कहा कि रामपुर तिराहा कांड के गुनाहगारों को 23 साल बाद भी देश की व्यवस्था दंडित कराने में नाकाम रही है। पीड़ितों की इंसाफ की उम्मीद अब टूटने लगी है। इसके विरोध में दो अक्तूबर को समिति प्रदेश भर में काला दिवस मनाएगी। ब्लॉक और जिला स्तर पर काली पट्टी, काले झंडे और काली टोपी पहनकर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।