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यौन शोषण प्रकरणः सरेंडर का अंदाज भी फिल्मी
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 21 Dec 2013 11:47 AM IST
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जेपी जोशी यौन प्रकरण की पीड़िता और ब्लैकमेलिंग की आरोपी युवती ने आखिर शुक्रवार को अदालत में सरेंडर कर दिया।
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अदालत आने और आत्मसमर्पण करने का उसका अंदाज पूरा फिल्मी रहा। वकील के वेश में आई युवती ने अदालत में सुबह से जुटे मीडियाकर्मियों समेत सादी वर्दी में उसे धरने के लिए तैयार बैठे पुलिसकर्मियों को भी गच्चा दे दिया।
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अदालत ने युवती को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अमर उजाला सुबह से कचहरी परिसर में पूरी कार्रवाई पर नजर बनाए हुए था। पेश है, युवती के सरेंडर की पल-पल की कवरेज:
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दिन: शुक्रवार। स्थान: कचहरी परिसर देहरादून
समय: दोपहर 11:15 बजे
अन्य दिनों की तरह कचहरी में आज भी गहमागहमी का माहौल है। लोग वकीलों के बस्तों पर मुकदमों की चर्चा कर रहे हैं, कुछ अलग-अलग न्यायाधीशों की अदालत के बाहर बारी के इंतजार में खड़े हैं।
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कुछ लोग जेपी जोशी यौन प्रकरण की पीड़ित युवती, जिस पर ब्लैकमेलिंग का आरोप भी है, के बारे में बातचीत कर रहे हैं। वह सरेंडर करने वाली थी, क्या हुआ? एक ने पूछा। दूसरा बोला, आज सरेंडर कर लेगी शायद।
समय: दोपहर 11:45 बजे
एक वकील कोर्ट पहुंचा। वकील ने युवती की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रिंकी साहनी की अदालत में एक प्रार्थनापत्र पेश किया। इसमें युवती का स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए शुक्रवार को भी आत्मसमर्पण न करने की मजबूरी जताई गई।
इस बीच अदालत के बाहर मीडियाकर्मियों और अन्य लोगों की भीड़ जुटने लगी, लेकिन प्रार्थनापत्र की बात पता चलते ही वे निकलने लगे। अदालत के बाहर तैनात पुलिसकर्मी भी छंट गए।
समय: दोपहर 01:00 बजे
न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रिंकी साहनी की अदालत के बाहर कुछ लोग जमे हैं। अंदर न्यायाधीश मौजूद हैं। अदालत युवती के प्रार्थनापत्र पर फैसला सुनाने की तैयारी में है। तभी कुछ वकील हाथ में फाइलें लिए अदालत की ओर बढ़ते हैं और सीधे भीतर घुस जाते हैं।
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साथ आई एक युवती ने अचानक अपना काला कोट उतार दिया। कोई कुछ समझता, इससे पहले उसने चेहरा सफेद चुन्नी से ढक दिया। अदालत में तैनात एक कर्मचारी ने टोका यह कौन है? बताया जाता है कि युवती पीड़िता और ब्लैकमेलिंग की आरोपी है।
समय: दोपहर 01:00 से 01:10 बजे
अदालत युवती के सरेंडर की कार्रवाई शुरू करती है। सरेंडर लेटर पर हस्ताक्षर के बाद अदालत दस मिनट के भीतर उसे 13 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज देती है।
दौड़ते हुए लौटे पुलिसकर्मी
युवती के प्रार्थनापत्र की जानकारी के बाद पुलिसकर्मी अदालत से इधर-उधर हो गए थे। सरेंडर की जानकारी मिलते ही वे लगभग दौड़ते हुए वहां पहुंचे, लेकिन तब तक अदालती कार्रवाई पूरी हो चुकी थी।
दूसरी ओर, कई मीडियाकर्मी भी सूचना मिलते ही पहुंचे लेकिन बमुश्किल दस मिनट कोर्ट में रखने के बाद युवती को जेल भेज दिया गया था। इस दौरान कचहरी में मौजूद लोग अदालत के बाहर जुट गए।
पुलिस को युवती को ले जाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। युवती से बात करने की कोशिश में कुछ मीडियाकर्मी गिर भी गए।
आधे घंटे पहले आ गई थी कचहरी
युवती दोपहर 12:30 बजे यानी सरेंडर से आधे घंटे पहले ही कचहरी परिसर पहुंच चुकी थी। लेकिन पुलिसकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पुलिस और मीडियाकर्मी अदालत के बाहर युवती का इंतजार कर रहे थे।
इस बीच युवती अपने वकील के चैंबर में मौजूद थी। माना जा रहा है कि बाद में वकीलों ने अदालत में सरेंडर न करने का प्रार्थनापत्र देने की रणनीति बनाई, ताकि पुलिसकर्मी कोर्ट से हट जाएं। ऐसा हुआ भी।
‘नीरज ने रची पूरी साजिश’
युवती ने कहा कि उसने किसी को ब्लैकमेल नहीं किया गया। उसने कहा कि मामले का दोषी नीरज चौहान है, सब कुछ उसका ही किया-धरा है। युवती के मुताबिक उसे झूठा फंसाया गया। बता दें कि पुलिस ने युवती पर ब्लैकमेलिंग और षड्यंत्र सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया है।
वकील ने कहा, तब किए हस्ताक्षर
अदालत में युवती हर कार्रवाई के लिए कदम उठाने से पहले अपने वकील की राय लेती नजर आई। सरेंडर पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया तो वकील की सहमति के बाद ही उसने साइन किया। युवती का कहना था कि वह कई बार धोखे खा चुकी है, अब हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है।
घर-दफ्तर से गायब हुए ‘पत्रकार’
यौन शोषण प्रकरण में ब्लैकमेलिंग के आरोपी दिल्ली के तीनों मीडियाकर्मी अपने ठिकानों से गायब हैं। न तो वे घर पर हैं, न ही दफ्तर में उनका कोई सुराग मिल रहा है।
तीनों के मोबाइल भी बंद हैं। गिरफ्तारी वारंट लेकर दिल्ली पहुंची पुलिस देर रात तक उनकी तलाश में दबिश दे रही थी। एक चैनल से जुड़े इन मीडियाकर्मियों की गिरफ्तारी के लिए जांच टीम के साथ एसटीएफ भी दिल्ली गई है।
एसटीएफ तीनों की मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है। काल डिटेल भी खंगाली जा रही है। शुक्रवार को पुलिस ने उनके संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी। लेकिन तीनों गायब हैं। पुलिस ने चैनल के कर्मचारियों से उनके बारे में पूछताछ कर जानकारी जुटाई है।
पुलिस ने युवती से जो शपथपत्र साइन कराया है, वह गलत है। उसने स्वेच्छा से ऐसा कोई शपथपत्र नहीं दिया। पीड़िता शुरू से ही कह रही है कि उसे फंसाया गया है। सोमवार को युवती की जमानत के लिए अदालत में प्रार्थनापत्र दिया जाएगा।
- जतिन दुग्गल, अधिवक्ता बचाव पक्ष