नेपाल में भारतीय शिक्षकों से छीनी नौकरी
छब्बीस साल से नेपाल में पढ़ा रहे एक भारतीय शिक्षक को वहां की सरकार नेपाल की नागरिकता न होने का हवाला देकर नौकरी से निकाल रही है।
इतना ही नहीं इस शिक्षक को पिछले पांच माह से वेतन भी नहीं दिया गया है। नेपाल के शिक्षा विभाग और लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास इस शिक्षक ने दोनों देशों के दूतावासों और प्रधानमंत्रियों को पत्र भेजकर अपनी व्यथा बताई तथा नौकरी से निकाले जाने की स्थिति में परिवारजनों के साथ आत्मदाह की धमकी दी है।
शिक्षक का आरोप है कि नेपाल की सरकार जानबूझकर भारतीयों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है। मूल रूप से फिरोजाबाद (आगरा) निवासी जसवंत सिंह यादव ने बताया कि वह परिवार के साथ उत्तराखंड के बनबसा में रहते हैं और बनबसा से ही रोजाना नेपाल के श्री सिद्धनाथ उच्च माध्यमिक विद्यालय जिमुवा में पढ़ाने जाते हैं।
पूर्व में भी हटाए जा चुके हैं भारतीय शिक्षक
वह 1989 से नेपाल बच्चों को विज्ञान पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके रिटायर होने में अभी आठ साल है, लेकिन नेपाल सरकार वहां की नागरिकता न होने का हवाला देकर उन्हें नौकरी से निकालना चाहती है।
उन्होंने बताया कि नेपाल शिक्षा विभाग और वहां के लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा भी उन्होंने उत्तीर्ण की है और अक्तूबर 2014 से उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि इस स्थिति में परिवारजनों के साथ आत्मदाह करने के सिवाय उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
पूर्व में भी नेपाली स्कूलों से भारतीय मूल के शिक्षकों को हटाया जा चुका है। 2005 में नेपाल स्थित फ्लोरिडा पब्लिक स्कूल से भी सात दक्षिण भारतीय शिक्षकों की सेवाएं सिर्फ इसलिए समाप्त कर दी गई थीं उनके पास नेपाल की नागरिकता नहीं थी।