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जनजातीय क्षेत्र के मंदिरों में इस साल नहीं होगा जागड़ा पर्व
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भंजरा-पंचरा में जागड़ा पर्व पर इस तरह उमड़ता था आस्था का सैलाब। फाइल फोटो
- फोटो : VIKAS NAGAR
कोरोना का असर जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के मंदिरों में मनाए जाने वाले जागड़ा पर्व पर भी पड़ा है। यह पहला मौका है जब क्षेत्र के किसी भी मंदिर में जागड़ा पर्व का आयोजन नहीं होगा। इससे श्रद्धालुओं में निराशा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए यह बेहद जरूरी है कि कोई भी सामूहिक आयोजन न किया जाए।
मालूम हो कि हर साल जागड़ा पर्व पर जनजातीय क्षेत्र के मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ता है। दूर दराज से लोग इस पर्व में हिस्सा लेने के लिए आते हैं। महासू मंदिर हनोल के साथ ही थैना महासू मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। साथ ही मोहना, पंचरा, गबेला, मलऊ, बिशलाड़, कच्छटा, कोटी विशायल आदि मंदिरों में भी धूमधाम से जागड़ा पर्व का मनाया जाता है। इस दिन देव पालकियों को मंदिर से बाहर निकाल स्नान के लिए पवित्र जलधारा पर ले जाया जाता है। दो दिन तक यह पर्व चलता है। इस साल 21 और 22 अगस्त को इस पर्व का आयोजना होना था, लेकिन महामारी के चलते इस साल पर्व के आयोजन को रद्द कर दिया गया है।
पंचरा भंजरा मंदिर समिति के अध्यक्ष कृपाराम शर्मा, मोहना चालदा महासू के छतराई शेर सिंह चौहान आदि का कहना है कि सिर्फ मंदिर समिति से जुड़े सदस्य परंपरा के निवृहन के लिए देव पालकी को स्नान के लिए पवित्र जलधारा तक ले जाएंगे। आरएस चौहान, अजब सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि वे हर साल जागड़ा पर्व पर मंदिर जाते थे। कहा कि उन्होंने कभी अपने पूर्वजों से भी पर्व का आयोजन न होने की बात नहीं सुनी।
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महामारी के चलते इस साल जागड़ा पर्व का आयोजन न करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सभी मंदिर समितियों के पदाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। - डॉ. अपूर्वा सिंह, एसडीएम
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मालूम हो कि हर साल जागड़ा पर्व पर जनजातीय क्षेत्र के मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ता है। दूर दराज से लोग इस पर्व में हिस्सा लेने के लिए आते हैं। महासू मंदिर हनोल के साथ ही थैना महासू मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। साथ ही मोहना, पंचरा, गबेला, मलऊ, बिशलाड़, कच्छटा, कोटी विशायल आदि मंदिरों में भी धूमधाम से जागड़ा पर्व का मनाया जाता है। इस दिन देव पालकियों को मंदिर से बाहर निकाल स्नान के लिए पवित्र जलधारा पर ले जाया जाता है। दो दिन तक यह पर्व चलता है। इस साल 21 और 22 अगस्त को इस पर्व का आयोजना होना था, लेकिन महामारी के चलते इस साल पर्व के आयोजन को रद्द कर दिया गया है।
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पंचरा भंजरा मंदिर समिति के अध्यक्ष कृपाराम शर्मा, मोहना चालदा महासू के छतराई शेर सिंह चौहान आदि का कहना है कि सिर्फ मंदिर समिति से जुड़े सदस्य परंपरा के निवृहन के लिए देव पालकी को स्नान के लिए पवित्र जलधारा तक ले जाएंगे। आरएस चौहान, अजब सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि वे हर साल जागड़ा पर्व पर मंदिर जाते थे। कहा कि उन्होंने कभी अपने पूर्वजों से भी पर्व का आयोजन न होने की बात नहीं सुनी।
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महामारी के चलते इस साल जागड़ा पर्व का आयोजन न करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सभी मंदिर समितियों के पदाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। - डॉ. अपूर्वा सिंह, एसडीएम